वैज्ञानिकों ने बुढ़ापे को मात देने की दिशा में बढ़ाया कदम: सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग तकनीक में बड़ी सफलता।
नई दिल्ली: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में शोधकर्ताओं ने एक ऐसी अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में मानव स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल सकती है। 'सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग' (Cellular Reprogramming) तकनीक के जरिए वैज्ञानिक अब कोशिकाओं को उनकी पुरानी, थकी हुई अवस्था से वापस 'युवा' और स्वस्थ अवस्था में लाने में सक्षम हो रहे हैं। क्या है सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग? सरल शब्दों में, जिस तरह एक कंप्यूटर को रीसेट करके उसकी सेटिंग्स को मूल स्थिति में लाया जा सकता है, उसी तरह सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग कोशिकाओं के 'जैविक घड़ी' (Biological Clock) को रीसेट करने की प्रक्रिया है। शरीर की हर कोशिका में डीएनए होता है, लेकिन समय के साथ उन पर कुछ 'एपिसैनेटिक निशान' (Epigenetic markers) जमा हो जाते हैं, जो कोशिका के काम करने की क्षमता को कम कर देते हैं और बुढ़ापे के लक्षण पैदा करते हैं। वैज्ञानिक इन निशानों को मिटाकर कोशिका को फिर से जवान बना रहे हैं। इस तकनीक के मुख्य लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक सुरक्षित रूप से इंसानों पर लागू होती ह...