विशेष रिपोर्ट: क्या आपकी जेब में मौजूद 'स्मार्टफोन' ही आपका सबसे बड़ा दुश्मन है?
नई दिल्ली | 14 जून, 2026 आज के दौर में डिजिटल तकनीक ने हमारी जीवनशैली को आसान तो बनाया है, लेकिन साथ ही एक अदृश्य खतरा भी पैदा कर दिया है। यह खतरा है—'डिजिटल जासूस' (Spyware)। एक समय में जासूसी के लिए इंसान या हार्डवेयर उपकरणों की जरूरत होती थी, लेकिन अब आपका स्मार्टफोन ही आपकी जासूसी का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। क्या है 'डिजिटल जासूस' (Spyware)? डिजिटल जासूस एक प्रकार का मैलवेयर (दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर) है जिसे उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना उसके डिवाइस (मोबाइल या कंप्यूटर) में गुप्त रूप से इंस्टॉल किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आपकी निजी जानकारी, चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, लोकेशन और बैंक विवरण चुराना होता है। ये 'जासूस' कैसे काम करते हैं? ये ऐप्स आम तौर पर सामान्य ऐप्स के मुखौटे में आते हैं। इनके काम करने के तरीके कुछ इस प्रकार हैं: अनुमति (Permissions) का दुरुपयोग: कई ऐप्स इंस्टॉल करते समय आपसे कैमरा, माइक, गैलरी और लोकेशन की अनुमति मांगते हैं। डिजिटल जासूस इन्हीं अनुमतियों का फायदा उठाकर आपकी बातें सुन सकते हैं और आपको ट्रैक कर सकते हैं। फिशिंग लिंक: अक्सर...