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लिंग का अर्थ और शिवलिंक का रहस्य: क्या हर लिंग 'शिवलिंग' है? एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण।

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नई दिल्ली  भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में 'लिंग' शब्द अत्यंत प्राचीन और पवित्र है। हालांकि, आधुनिक समय में इस शब्द को लेकर समाज में काफी भ्रम और विवाद देखे जाते हैं। सोशल मीडिया और चर्चाओं में अक्सर यह सवाल उठता है: "क्या हर लिंग, शिवलिंग है?" इस लेख में हम इसी रहस्य को ऐतिहासिक और भाषाई दृष्टि से समझने की कोशिश करेंगे। 'लिंग' शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है? संस्कृत व्याकरण के अनुसार, 'लिंग' का अर्थ होता है—'चिह्न' या 'प्रतीक' (Symbol/Mark)। इसका अर्थ केवल शारीरिक अंग से नहीं, बल्कि किसी वस्तु के 'पहचान' या उसके मूल स्वरूप से है। जैसे, 'स्त्रीलिंग' और 'पुल्लिंग' व्याकरण में शब्दों के प्रकार बताने के लिए उपयोग किए जाते हैं, न कि शरीर के अंगों के लिए। शिवलिंग और 'लिंग' में अंतर शास्त्रों में 'शिवलिंग' को निराकार ब्रह्म का प्रतीक माना गया है। 'लिंग' शब्द यहाँ 'लय' (जिसमें सब कुछ समा जाए) और 'गम' (जहाँ से सब कुछ उत्पन्न हो) से मिलकर बना है। यह ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा का प्रती...

बिनसर: उत्तराखंड का एक अनछुआ स्वर्ग – शांति, प्रकृति और रोमांच का संगम

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  यदि आप शहर की शोर-शराबे भरी जिंदगी से दूर, हिमालय की गोद में कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो बिनसर (Binsar) आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में समुद्र तल से 2,420 मीटर की ऊँचाई पर स्थित बिनसर अपनी शांति, घने जंगलों और हिमालय के विहंगम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। 🏔️ प्राकृतिक सौंदर्य: प्रकृति की गोद में बिनसर का वातावरण आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। यहाँ चारों ओर देवदार, बांज (Oak) और रोडोडेंड्रोन के घने जंगल हैं। बिनसर की सबसे खास बात यहाँ से दिखने वाला हिमालय का 300 किमी लंबा नज़ारा है। यहाँ से नंदादेवी, त्रिशूल, नंदाकोट और केदारनाथ जैसी ऊँची चोटियाँ इतनी साफ दिखती हैं कि आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। 📍 बिनसर के प्रमुख आकर्षण बिनसर वन्यजीव अभयारण्य (Binsar Wildlife Sanctuary): यह 45.59 वर्ग किमी में फैला एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ आप तेंदुए, हिमालयी भालू, काकड़ (बार्किंग डियर) जैसे जानवरों के साथ-साथ दुर्लभ पक्षियों को भी देख सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जन्नत से कम नहीं है। बिनसर महादेव मंदिर: अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध यह ...

गर्व की बात: अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की वैश्विक पहचान, 'ई-हॉस्पिस, लंदन' में मिली जगह!

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  अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड: स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्तराखण्ड का नाम अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमक रहा है। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज) के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। संस्थान के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा किए जा रहे 'दर्द एवं उपशामक चिकित्सा' (Pain and Palliative Care) के कार्यों को विश्व के प्रतिष्ठित डिजिटल मंच 'ई-हॉस्पिस' (E-Hospice), लंदन में प्रकाशित किया गया है। क्या है यह उपलब्धि? ई-हॉस्पिस, लंदन हॉस्पिस और पेलिएटिव केयर के क्षेत्र में काम करने वाला विश्व का अग्रणी मंच है। यहाँ केवल उन नवाचारों और कार्यों को स्थान मिलता है, जो वास्तव में समाज के लिए मिसाल बन रहे हों। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज द्वारा पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में जिस तरह से दर्द एवं उपशामक चिकित्सा को स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य हिस्सा बनाया गया है, उसे पूरी दुनिया के सामने एक मॉडल के रूप में सराहा गया है। रिपोर्ट में किन कार्यों को मिला स्थान? ई-हॉस्पिस की रिपोर्ट में अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के निम्नलिखित नवाचारों का विशेष उल्लेख किया गया है: ...

गणानाथ मंदिर, : कुमाऊं का एक शांत और आध्यात्मिक स्वर्ग ।

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ताकुला अल्मोड़ा उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी शांति और सुंदरता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बागेश्वर जिले के 'ताकुला' के पास स्थित गणानाथ मंदिर की बात ही कुछ और है। इतिहास और मान्यता =============== गणानाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जो इसे और भी रहस्यमयी और आकर्षक बनाता है। माना जाता है कि यहाँ भगवान शिव स्वयं लिंग रूप में विराजमान हैं। स्थानीय लोगों की यहाँ गहरी आस्था है और हर साल 'गणानाथ का मेला' यहाँ एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य। =================== यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2116 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से हिमालय की चोटियों का जो नज़ारा दिखता है, वह पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। चारों ओर घने बांज और बुरांश के जंगल इस जगह को एक शांत वातावरण प्रदान करते हैं, जो ध्यान लगाने के लिए एकदम सही है। कैसे पहुँचें? =========== निकटतम शहर: बागेश्वर (लगभग 35-40 किमी)। ताकुला तक आप सड़क मार्ग से पहुँच सकते हैं, जहाँ से मंदिर तक की छोटी और सुखद ट्रेकिंग क...

विवेकानंद सभागार में आयोजित हुआ सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह।

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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह गुरुवार को विवेकानंद सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं माननीय राज्यपाल उत्तराखंड लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान किए गए। माननीय राज्यपाल द्वारा 15 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जबकि पांच विद्यार्थियों को प्रायोजित स्मृति स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषयों में कुल 48 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर माननीय राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित “विधि सहयोगी ऐप” तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शिक्षक डॉ. ललित चंद्र जोशी की पुस्तक “पत्रकारिता : संभावनाएं, भविष्य एवं चुनौतियां” का विमोचन किया। साथ ही पदक प्रायोजकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन...

कुमाऊँनी लोक संस्कृति के रंगों से सजा अंतर-विद्यालयीय युगल नृत्य प्रतियोगिता आयोजित।

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अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के तत्वावधान में गुरुवार, 18 जून 2026 को होटल शिखर, अल्मोड़ा में कुमाऊँनी लोकगीतों पर आधारित अंतर-विद्यालयीय युगल नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से कुमाऊँ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर उपस्थित दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कैलाश शर्मा रहे। इस अवसर पर शिक्षा, साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री अमरनाथ भट्ट, श्री दिनेश पाण्डेय एवं डॉ. जे.सी. दुर्गापाल को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में ब्लूमिंग बड्स, सब जूनियर एवं सीनियर वर्गों के कुल 68 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने पारंपरिक कुमाऊँनी वेशभूषा एवं लोकधुनों पर आधारित उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों तथा निर्णायक मंडल को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन सुश्री शगुन त्यागी, श्रीमती ममता वाणी एवं श्रीमती लता पाण्डेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती मीता उपाध्याय, श्री गिरीश मल्होत्...

पहाड़ में स्वास्थ्य क्रांति: अब अल्मोड़ा में भी मिलेगा दांतों का 'हाई-टेक' इलाज! 🦷

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  अल्मोड़ा  क्या आप जानते हैं कि अब आपको दांतों की जटिल जांच के लिए हल्द्वानी या बड़े शहरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है? अल्मोड़ा के बेस अस्पताल ने अपने डेंटल विभाग में सीबीसीटी (CBCT) मशीन इंस्टॉल कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है जिन्हें अब तक छोटी-छोटी जांचों के लिए भारी खर्चा करना पड़ता था। क्यों खास है यह सुविधा? सटीक निदान: यह मशीन दांतों के अलावा जबड़े और मुंह के अंदरूनी ट्यूमर तक का सटीक पता लगा सकती है। समय और पैसे की बचत: अब आपको इलाज के लिए शहर से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बढ़ती पहुंच: रोजाना अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत से दर्जनों मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। आने वाला है एक और बड़ा बदलाव! हमारे डेंटल सर्जन डॉ. अनिल पांडे के अनुसार, अस्पताल में जल्द ही लेजर तकनीक से डेंटल इंप्लांट की सुविधा भी शुरू होने वाली है। यानी अब बिना ज्यादा दर्द के, आधुनिक तकनीक से अपने दांतों का इलाज कराना आसान होगा। पहाड़ के स्वास्थ्य तंत्र में हो रहे ये सुधार वाकई सराहनीय हैं! अगर आप या आपका कोई जानने ...

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