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ठेका कर्मियों को नई आउटसोर्सिंग प्रक्रिया ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। गौरतलब है कि पहले इन कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), और ग्रेच्युटी जैसे महत्वपूर्ण वैधानिक लाभ मिलते थे। लेकिन अब ये लाभ या तो पूरी तरह से हटा दिए गए हैं, या इन्हें ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रति माह मात्र ₹5,000 जितना कम भुगतान किया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी के मानकों का सरासर उल्लंघन है।नई व्यवस्था के तहत BSNL ने स्वयं को प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की स्थिति से हटा लिया है। निश्चित रूप से, इस कदम से कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन और वैधानिक लाभों को सुनिश्चित करने में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। स्पष्ट है कि इसका भरपूर लाभ संबंधित ठेकेदारों द्वारा इन कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करके उठाया जा रहा है।
ठेका कर्मियों का कहना है कि संबंधित ठेकेदारों द्वारा उन्हें विगत तीन माह का वेतन तक नहीं दिया गया है। इसके अलावा, सेवा स्तर समझौते (Service Level Agreement) के नाम पर कर्मचारियों को अक्सर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि इनमें से कई कर्मचारी 20 से 25 वर्षों तक लगातार बीएसएनएल के लिए काम करते रहे हैं। साथ ही, यह भी शिकायत है कि सभी ठेका कर्मचारियों को नई प्रक्रिया के तहत शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण कुछ पुराने और अनुभवी लोग बाहर रह गए हैं।
दुःख की बात है कि इन ठेका कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) का कोई भी लाभ देने का प्रावधान तक नहीं रखा गया है।
ज्ञात रहे कि अल्मोड़ा में शिफ्ट इंटरकॉम के अंतर्गत करीब 30 से 35 अप्रशिक्षित ठेका कर्मी कार्यरत हैं। इनमें से कई तो वर्ष 1998 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ठेका कर्मियों ने बताया कि इससे पहले का पी.एन.जी कंपनी का ठेका 4 साल तक चला था। उस दौरान न तो नियमित वेतन मिला और न ही पीएफ जमा करवाया गया था। उस ठेके का भी तीन माह का वेतन आज तक बकाया है। कर्मचारियों ने कई बार शिकायत की, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।
1 सितंबर, 2025 से लागू हुए नवीन ठेके के अनुसार यह तय हुआ था कि अब ₹541 प्रति कार्य दिवस के हिसाब से वेतन मिलेगा, और साथ ही भविष्य निधि (PF) व कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) भी काटा जाएगा।
दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि इस बार भी अप्रशिक्षित ठेका कर्मियों को ₹14,066 के बजाय केवल ₹9,000 वेतन दिया जा रहा है।
आरोप है कि कर्मचारियों का पीएफ भी कम काटा जा रहा है।
यह सारी जानकारी जैम पोर्टल में अपलोड किए गए एग्रीमेंट में भी उपलब्ध है। इसलिए, प्रशासन को अतिशीघ्र इस मामले में हस्तक्षेप कर ठेका कर्मियों के साथ हो रहे इस अन्याय को रोकना चाहिए।
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