आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वी जयंती आज, प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष भर चलने वाले समारोह का किया शुभारंभ

पूरी तरह से अंधविश्वासी होने के बजाय वर्तमान जीवन में कर्म अधिक महत्वपूर्ण हैं– दयानन्द सरस्वती

पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने हवन यज्ञ में हिस्सा लिया। महर्षि दयानंद जी की 200वीं जन्म जयंती का ये अवसर ऐतिहासिक है और भविष्य के इतिहास को निर्मित करने का अवसर भी है।

मानवता के भविष्य के लिए प्रेरणा का पल

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि जो बीज स्वामी जी ने रोपा था, वह आज विशाल वट-वृक्ष के रूप में पूरी मानवता को छाया दे रहा है। जब महर्षि दयानंद का जन्म हुआ था तब देश सदियों की गुलामी से कमजोर पड़ कर अपनी आभा, अपना तेज, अपना आत्मविश्वास सब कुछ खोता चला जा रहा था। प्रति क्षण हमारे संस्कार, आदर्श को चूर-चूर करने का प्रयास होता था। महिलाओं को लेकर भी समाज में जो रूढ़ियां पनप गईं थीं, महर्षि दयानन्द जी उनके खिलाफ भी एक तार्किक और प्रभावी आवाज बनकर उभरे। उन्होंने कहा कि यह अवसर ऐतिहासिक है और भविष्य के इतिहास को निर्मित करने का है। यह पूरे विश्व के मानवता के भविष्य के लिए प्रेरणा का फल है। स्वामी दयानंद जी और उनका आदर्श था, हम पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाएं। पीएम ने आगे कहा कि ये मानवता के भविष्य के लिए प्रेरणा का पल है। स्वामी दयानंद जी का आदर्श था-‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ अर्थात हम पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाएं। हम पूरे विश्व में श्रेष्ठ विचारों व मानवीय आदर्शों का संचार करें।

पीएम मोदी ने कहा कि 21 वीं सदी में आज जब विश्व अनेक विवादों में फंसा है, हिंसा और अस्थिरता में घिरा हुआ है, तब महर्षि दयानंद सरस्वती जी का दिखाया मार्ग करोड़ों लोगों में आशा का संचार करता है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आज से डेढ़ सौ वर्ष पूर्व विश्व को श्रेष्ठ बनाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और पर्यावरण व प्रकृति को संभाल कर रखने का आह्वान किया था। आजादी के अमृत-काल में देश उन सुधारों का साक्षी बन रहा है, जो स्वामी दयानंद की प्राथमिकताओं में थीं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास

उन्होंने कहा कि आज विवादों में फंसे विश्व में स्वामी दयानंद का बताया मार्ग करोड़ों लोगों में आशा का संचार कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में भी जिन विषयों को उठाना कठिन होता है, उस पर स्वामी दयानंद ने आज से 150-200 साल पूर्व कार्य किया है। उन्होंने भेदभाव और कुरीतियों को दूर करने तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास किए। स्वामी दयानंद ने उस समय प्रयास किया जब यूरोप में महिला अधिकारों का विषय दूर की बात होती थी। उन्होंने कहा कि आज हम देश को बिना भेदभाव की नीतियों और प्रयासों के साथ आगे बढ़ते देख रहे हैं। गरीब, पिछड़ों और वंचितों की सेवा पहला यज्ञ है। ‘वंचितों को वरीयता’ इस मंत्र को लेकर हर गरीब के लिए मकान, उसका सम्मान और हर व्यक्ति के लिए चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही है।

भारतीय परंपरा को दूषित करने के प्रयास के दौर में ‘संजीवनी’

पीएम मोदी ने स्वामी दयानंद की भेदभाव दूर करने और लोगों को भारत की प्राचीन संस्कृति व परंपरा से जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में अध्यात्म और आस्था आडंबर का रूप धारण कर लेती हैं। उनका प्रयास उस दौर में था, जब विदेशियों की ओर से भारतीय परंपरा के खिलाफ ‘नरेटिव’ गढ़े जा रहे थे। स्वामी दयानंद परंपरा को दूषित करने के प्रयास के उस दौर में ‘संजीवनी’ बूटी बनकर आए थे।

कर्तव्य ही सबसे पहला मानव धर्म

उन्होंने कहा कि आज देश पूरे गर्व के साथ ‘अपनी विरासत पर गर्व’ का आह्वान कर रहा है। आज देश पूरे आत्मविश्वास के साथ कह रहा है कि हम देश में आधुनिकता लाने के साथ ही अपनी परंपराओं को भी समृद्ध करेंगे। पीएम ने कहा कि पूजा-पाठ और रीति रिवाज से अलग भारत में धर्म का निहितार्थ बिल्कुल अलग रहा है। वेदों ने जिस जीवन पद्धति को परिभाषित किया है, उसमें कर्तव्य ही सबसे पहला मानव धर्म है। कर्तव्यों का भान करते हुए हमारे ऋषियों और मुनियों ने राष्ट्र और समाज के कई आयामों की जिम्मेदारी उठाई और भारतीय संतों ने भाषा, योग और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों पर अपना योगदान दिया।

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