उत्तराखंड सरकार ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को यात्रा के दौरान दोनों धामों के लिए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की हैं।
अपर मुख्य सचिव (गृह) राधा रतूड़ी द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 21 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल को श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को चलाने की शक्ति निहित की गई है।
आदेश में कहा गया है, “इसके लिए कार्यपालक दंडाधिकारी नियुक्त किए जाते हैं, जिन्हें विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी कहा जाएगा। दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कार्यपालक दंडाधिकारी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम की निर्धारित सीमा के भीतर कर सकते हैं।”
इस संबंध में बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने पिछले दिनों सरकार को पत्र लिखा था अजेंद्र ने पत्र में श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धामों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बीकेटीसी के सीईओ से यात्रा अवधि के दौरान दोनों तीर्थों में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के अधिकार देने का अनुरोध किया था.
आदेश में कहा गया है कि बीकेटीसी के सीईओ को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने से दोनों धामों में विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन में सुविधा होगी।
इससे पूर्व दिन में अतिरिक्त मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने चारधाम यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए होटल व्यवसायियों, तीर्थ पुरोहित समाज व टूर आपरेटर के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के लिए बिजली, पानी की व्यवस्था और ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को सुचारू और परेशानी मुक्त बनाया जाए ।
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