“आओ हम सब योग करें” अभियान; अल्मोड़ा जनपद के विविध स्थलों पर नियमित योगाभ्यास का सफल संचालन

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन एवं नमामि गंगे उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के योग विज्ञान विभाग द्वारा चलाया जा रहा “निःशुल्क योग शिविर – आओ हम सब योग करें” अभियान जनसहभागिता की मिसाल बनता जा रहा है।

21 मई से 21 जून 2025 तक आयोजित इस महाअभियान के अंतर्गत अल्मोड़ा जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों प्रतिभागियों द्वारा प्रतिदिन प्रातःकाल नियमित योग सत्रों में सहभागिता की जा रही है। यह अभियान समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाकर स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे रहा है।
नियमित योगाभ्यास के प्रमुख केंद्र: शहरी क्षेत्र:
ग्रीन फील्ड पब्लिक स्कूल, रानीधारा (नियर साईं मंदिर), स्पिन डेल्स पब्लिक स्कूल, मिनर्वा एकेडमी, पुलिस लाइन, राजा आनंद सिंह जी.जी.आई.सी., अटल उत्कर्ष जी.आई.सी., गीतांजलि (सिजवाली), न्यू इंदिरा कॉलोनी, द होटल शिवालिक, शारदा पब्लिक स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर (जीवनधाम), हेमवती नंदन बहुगुणा स्पोर्ट्स स्टेडियम, फॉरेस्ट कॉलोनी, नंदा देवी, सरस्वती शिशु मंदिर (नरसिंह बड़ी), एस.एस.जे परिसर, डी.डी.यू. ग्रामीण कौशल योजना केंद्र, ज्ञानोदय बाल आदर्श पाठशाला (डीनापानी), एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज, आकाशवाणी, ग्रेस पब्लिक स्कूल, रैमजे इंटर कॉलेज, होली एंजेल पब्लिक स्कूल, केडी मेमोरियल स्कूल आदि।

ग्रामीण व अर्द्ध-शहरी क्षेत्र:
प्राथमिक विद्यालय खत्याड़ी, प्राथमिक विद्यालय धमास, प्राथमिक विद्यालय गधोली, प्राथमिक विद्यालय द्वाराहाट, प्राथमिक विद्यालय तलाड, प्राथमिक विद्यालय अलई, प्राथमिक विद्यालय सरसों, जूनियर हाई स्कूल गोपालधारा, जूनियर हाई स्कूल दुगालखोला मीना, सरस्वती शिशु मंदिर खोलटा, सरस्वती विद्या निकेतन खत्याड़ी, ग्राम सुपई, ग्राम अलई, ग्राम खत्याड़ी, ग्राम सिराड़, ग्राम खान, ग्राम बरशिमीं, तल्ला चीनाखान, मानस पब्लिक स्कूल, आरोग्य मंदिरम (पीपना), सिमकिनी मैदान, ईस्ट पोखरखाली, शालीधार जानकी, चंपानौला, काकड़ीघाट, राजकीय प्राथमिक विद्यालय चामी, ओके कॉटेज, जिया रानी छात्रावास, पीएम श्री जीआईसी लोहाघाट आदि।
सांस्कृतिक चेतना के साथ स्वास्थ्य का समन्वय
योग विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन भट्ट के संरक्षण में संचालित इस अभियान का उद्देश्य केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गंगा नदी की वैदिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को भी समाज तक पहुंचाना है। कई स्थलों पर वेद, उपनिषद और पुराणों पर आधारित संवाद सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा गंगा की आध्यात्मिक भूमिका और संरक्षण पर विशेष व्याख्यान दिए जा रहे हैं।
जनसहभागिता बनी प्रेरणा का स्रोत
इस अभियान को आम जन, विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय संगठनों का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे यह कार्यक्रम एक सामुदायिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जागरूकता अभियान के रूप में उभर रहा है।
यह प्रयास योग और संस्कृति के समन्वय का एक जीवंत उदाहरण है, जो न केवल लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दे रहा है, बल्कि उन्हें अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का भी कार्य कर रहा है।

D S Sijwali

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