लोकगायिका सीमा गुसाई ने उत्तराखंड सांस्कृतिक मंच में बनाई अपनी पहचान, जानिए इनके बारे में

कहते है संस्कृति के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की योग्यता को बढाया या शक्तिशाली किया जा सकता है। इसी तरह उत्तराखंड की सीमा गुसाई अपने लोकगीतों से देवभूमि की संस्कृति को शक्तिशाली बना रही हैं।

https://youtu.be/vJUOFYjn0MM

सीमा गुसाई रुद्रप्रयाग जिले के छिनका गांव पोस्ट घोलतीर की रहने वाली साधारण एवं गरीब परिवार की महिला उम्र पच्चास साल पांचवीं पास  अपने घर परिवार कामकाज के साथ साथ लंबे समय से उत्तराखंड की लोक संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाली मात्र शक्ति है।दस साल पहले सीमा गुसाई उतराखड के छोटे छोटे प्रोग्राम व रामलीला अभिनव व देवी देवताओं के जागर गाया करती रही है।सन 2015से  सीमा गुसाई लोकगायिका अपने अलग अलग अंदाज व अलग अलग तरीके से मां नंदा देवी जागर ,व अन्य देवी देवताओं के जागर रामाबोराणी के स्वामी की बारह वर्ष तक  प्रदेश रहने के बारे में  अभिनय किया।
सन 2018से सीमा गुसाई लोकगायिका के जागर रामाबोराणी कथा को देखते हुए उत्तराखंड सांस्कृतिक मंचों रिकार्डिंग करना शुरू किया।


समाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने बताया सीमा गुसाई लोकगायिका के पिता हाईस्कूल में चुतर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे उस समय रेडियो हुआ करता था सीमा तीसरी व चौथी कक्षा में पढ़ती थी रेडियो के द्बारा गुननाया करती थी रेडियो के माध्यम से सीमा लोकगीत व अन्य गाथा सुनकर धीरे धीरे अपने लोकप्रियता से छोटे छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपना प्रतिभाग किया। उसके बाद सीमा ने अपनी शादी के बाद गांव में महिलाओं को एकटठा करके देवी देवताओं के जागर व अन्य देश भक्ति गानों के लिए प्रेरित किया आज 52साल की उम्र सीमा गसाई रामलीला मंचन व रामाबौराणी, मां नंदा देवी जागर व अन्य लोकथा में निपुण है।सीमा गुसाई ने बताया मै गरीब परिवार से थी लेकिन जंगलों में घास काटते काटते सोचती थी कभी मुझे उत्तराखंड के लोकगीत व देवी देवताओं के जागर केलिए मंच मिलेगा लेकिन आज , सीमा गुसाई ने 52साल में कुमाऊनी गढ़वाली जौनसारी लोकगीतों के साथ साथ उतराखड के देवी देवताओं के जागर व रामाबौराणी के नाटक में अपनी अलग ही पहचान बनाई सीमा गुसाई उतराखड देवी देवताओं के  जागर रामाबोराणी कथा के साथ साथ सीमा कुमाऊनी, गढ़वाली, जौनसारी लोकगीतों को भी अलग अलग मंचों पर गाया करती है।
नेगी ने बताया सीमा ने बचपन से ही उत्तराखंड के देवी देवताओं के जागर रामाबोराणी, अन्य देवी अवतार के बारे अपनी लोकप्रियता सुंदर तरीके से दर्शाया है।
सीमा गुसाई की तरह और भी महिलाए हमारी संस्कृति व परंपरा के बारे में जानती है परन्तु उनको आगे लाने के लिए मंच तक पहुंचाने के लिए सहयोग नहीं मिलता इसलिए आगे नहीं आ पाती। अपनी संस्कृति व परंपरा के लिए आगे आना चाहिए उत्तराखंड की संस्कृति ही उत्तराखंड की पहचान है।

swati tewari

working in digital media since 5 year

Recent Posts

जंगल गई महिला को जंगली जानवर उठा ले गया, 4 किमी अंदर मिला अधखाया शव

जंगल गई महिला को जंगली जानवर उठा ले गया, 4 किमी अंदर मिला अधखाया शव...

9 hours ago

शिक्षा संकाय में ‘युवा पीढ़ी, परिवार एवं विश्वशांति’ विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

शिक्षा संकाय में 'युवा पीढ़ी, परिवार एवं विश्वशांति' विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन......

10 hours ago

Almora रेट्रो साइलेंसर से नगर में दहशत फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई, 04 बाइक सीज

रेट्रो साइलेंसर से नगर में दहशत फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई, 04 बाइक सीज.....

14 hours ago

Uttarakhand धामी सरकार में इन नेताओं को मिले दायित्व

Uttarakhand धामी सरकार में इन नेताओं को मिले दायित्व.....

18 hours ago

अल्मोड़ा: सुकना-पभ्या सड़क निर्माण में देरी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जिलाधिकारी जी को सौंपा ज्ञापन

Almora अल्मोड़ा: सुकना-पभ्या सड़क निर्माण में देरी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जिलाधिकारी जी को…

1 day ago

Uttarakhand एकतरफा प्यार के चलते युवक ने खुद को मारी गोली

Uttarakhand एकतरफा प्यार के चलते युवक ने खुद को मारी गोली.....

1 day ago