देशभर में मनाया जा रहा भगवान सूर्य को समर्पित त्योहार मकर संक्रांति, जाने इसका महत्व

सनातन धर्म में सभी त्योहार चन्द्रमा की गणना व तिथियों के अनुसार मनाए जाते हैं, वहीं मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य पर आधारित पंचांग की गणना के आधार पर मनाया जाता है। सूर्य जिस दिन धनु राशि से निकलकर मकर में प्रवेश करते हैं उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। इसलिए यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है जिसका अर्थ है कि सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है। उत्तरायण की शुरुआत के साथ ही ठंड का असर भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसलिए यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन सवेरे ब्रह्म भोर में गंगा स्नान को बेहद पवित्र समझा जाता है।

महत्व

मकर संक्रांति पर्व का पूरे देश में विशेष महत्व है। यह साल की शुरुआत में पहला ऐसा पर्व है जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। इस पर्व के शुरू होने के साथ ही पूरा देश एक जुट नजर आता है। फिर चाहे इस पर्व के नाम अलग-अलग ही क्यों न हो।

दान का विशेष महत्व

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद दान का विशेष महत्व होता है। स्नान के बाद श्रद्धालु गंगाजल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दे घाट के किनारे ही पूजा-अर्चना कर यथाशक्ति तिल, गुड़, चावल व खिचड़ी इत्यादि का दान पुन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया कल भी जारी रहेगी। मकर संक्रांति के उपलक्ष में पूरे देश में कई स्थानों पर जगह-जगह प्रसाद भी बंट रहा है।

अलग-अलग हिस्सों में त्योहार के अलग-अलग नाम

बता दें मकर संक्रांति का त्योहार पूर देश में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे ‘खिचड़ी’, दक्षिण भारत में ‘पोंगल’ के रूप में मनाते है। वहीं असम में इसे ‘बिहू’ व पंजाब मे ‘लोहड़ी’ के रूप में मनाते हैं। सब जगह अपनी-अपनी परम्पराएं हैं। लोग अपनी परम्परा से इसे मनाते हैं। गुजरात व राजस्थान में इस दिन पतंग उड़ाई जाती है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ मंदिर में नेपाल नरेश की ओर से खिचड़ी चढ़ाई जाती है।

योतिषाचार्यों का कहना है शनिवार की रात्रि 8:43 बजे से मकर राशि में सूर्य देव के प्रवेश करने से इस पर्व का प्रारंभ हुआ। इसलिए रविवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाना बहुत शुभ रहेगा। इस दिन स्नान, दान और पूजा पाठ के लिए पुण्य काल सुबह 7 बजे शुरू होगा जो कि शाम 6 बजे तक रहेगा। त्योहारों की तिथि तय करने वाले ग्रंथ धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु में भी इस बात का जिक्र है कि सूर्यास्त होने के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो अगले दिन पर्व मनाते हुए स्नान, दान और पूजा करनी चाहिए।

swati tewari

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