उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य की सीमाओं पर पुलिस और राज्य कर विभाग को एकल प्रयोग प्लास्टिक के प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता जितेंद्र यादव ने जनहित याचिका में कहा कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के आधार पर पूर्व में मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट ने 7 जुलाई 2022 से लगातार इसके खिलाफ निर्देश देते हुए प्लास्टिक निर्माताओं को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंजीकरण कराने और राज्य पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में एक्शन प्लान पेश करना अनिवार्य किया था। दिसंबर 2022 में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंप्लायंस कर आदेश पारित कर प्लास्टिक से संबंधित फैक्टरियों की सहमति वापस कर दी थी।
इस जनहित याचिका की सुनवाई पर मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने राज्य में अजैविक कचरे के निस्तारण के लिए सरकार को नियमावली बनाने को कहा और कूड़ा वाहनों में एक माह में जीपीएस लगाने की कार्रवाई पूरी करने के आदेश दिए।
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