Operation Sindoor: भारत के जवाबी कार्रवाई पर विश्वभर से आई अलग प्रतिक्रियाएं, जानिए

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटक मारे गए। इसके जवाब में भारत ने 7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त कार्रवाई में 1:44 बजे रात को नौ बड़े आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया गया, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय शामिल थे।

यह सैन्य कार्रवाई भारत की आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति और ‘राइट टू रिस्पॉन्ड’ के तहत की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह हमला केवल आतंकी शिविरों और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर तक सीमित रखा गया ताकि नागरिकों को नुकसान न हो और आतंकियों का मनोबल तोड़ा जा सके।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं

भारत की इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशा जताई कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह तनाव जल्दी समाप्त हो। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही और शांति की उम्मीद जताई।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता व्यक्त की और दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की। उनका बयान यह रेखांकित करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका हमेशा सताती रही है।

चीन ने भारत और पाकिस्तान दोनों से शांति और स्थिरता बनाए रखने, संयम दिखाने और हालात को और अधिक जटिल न बनाने की अपील की। जापान ने भी 22 अप्रैल के आतंकी हमले की निंदा करते हुए बातचीत के जरिए स्थिति को स्थिर करने की जरूरत पर जोर दिया। संयुक्त अरब अमीरात ने स्पष्ट शब्दों में सैन्य तनाव घटाने और संवाद को प्राथमिकता देने की अपील की।

रूस की स्पष्ट लाइन

रूस का रुख इन प्रतिक्रियाओं से कुछ अलग नजर आया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात करते हुए साफ कहा कि पहलगाम हमले के गुनहगारों को न्याय के कठघरे में लाना जरूरी है। रूस की ओर से जारी बयान में कहीं भी संयम बरतने या कूटनीतिक हल पर ज़ोर नहीं दिया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि रूस भारत की आतंक के खिलाफ कार्रवाई को वैध मानता है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने पूंछ में सीजफायर उल्लंघन किया, जिसमें आठ नागरिकों की जान चली गई और करीब 25 लोग घायल हो गए। यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिकों की जान पर भी सीधा असर डालता है।

दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं, और वैश्विक शक्तियां(अमेरिका, चीन, रूस) इस संघर्ष में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती रही हैं। आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति, कूटनीतिक दबाव, और वैश्विक समर्थन के बीच संतुलन साधना उसकी विदेश नीति के लिए एक चुनौती है।

भारत का रुख: आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। चाहे 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक हो, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक, या अब 2025 का ऑपरेशन सिंदूर — हर बार भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी सीमाओं पर हुए हमलों को अनुत्तरित नहीं छोड़ेगा। इस नीति ने घरेलू स्तर पर राजनीतिक समर्थन तो बढ़ाया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इससे पैदा होने वाले तनावों को संभालना भारत के लिए एक लंबी रणनीतिक परीक्षा है।

भविष्य की राह

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में स्थायी शांति तभी संभव है जब आतंकवाद के मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाए जाएँ। जब तक पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों को पनाह देता रहेगा, भारत के लिए सीमा पार जवाबी कार्रवाई करना अनिवार्य बना रहेगा। वैश्विक समुदाय की अपीलें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे तभी असरदार होंगी जब वे पाकिस्तान पर भी समान रूप से दबाव डालें।

ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल पर कोई समझौता नहीं करेगा। यह कार्रवाई न केवल सैन्य सफलता थी, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी था — भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। अब यह देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम से क्या सबक लेता है, और क्या दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए ठोस पहल होती है या नहीं।

swati tewari

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