सरकार से होने वाली नियुक्ति व उसके तैनाती स्थल की सूचना सार्वजनिक करने की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे बोलें जनता को चिकित्सा सेवाओं पर सजग नजर रखने की जरूरत



अल्मोड़ा: पर्वतीय चिकित्सा सेवाओं के प्रति पैनी नजर से ही इन्हें पटरी पर लाया जा सकता है। यह बात अल्मोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने अपने कार्यों से साबित की है। बीते 6 सालों से भी अधिक समय से बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सजग सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका निभाने वाले संजय पाण्डे ने अल्मोड़ा मेडिकल कालेज की अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए अपनी प्रमाणित शिकायतों के आधार पर कुछ प्रशासनिक सुधार कराने में भी सफलता अर्जित की है। संजय पाण्डे ने बताया कि जिले के अस्पताल हों अथवा मेडिकल कालेज जब तक नागरिक समाज सजग होकर अपने स्वास्थ्य व चिकित्सा के अधिकारों के प्रति संघर्ष नहीं करेगा वह लगातार इन्ही कुव्यवस्थाओं का शिकार बनेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न ऐजेंसिंयों व सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में भरे जाने वाले खासकर चिकित्सकों के पदों की सूचना आम जन तक नहीं पहुंच पाती जिस कारण अनेक बाद चिकित्सक यहां नहीं आते अथवा विभागीय सांठगांठ से वे कहीं और चले जाते हैं। उन्होंने सरकार से हर बार होने वाली नियुक्ति व उसके तैनाती स्थल की सूचना सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि रिक्त पदों के साथ कौन सा चिकित्सक किस येाग्यता से यहां आ रहा है यह जनता को ज्ञात होना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने शासन स्तर पर अनेक मंचों पर संघर्ष कर वेटिंग चिकित्सकों की सूची व प्रतिदिन चिकित्सालयों से उनके द्वारा दी गई सेवाओं का व्यौरा भी नियमित विभाग को भेजने की मांग की जिससे पारदर्शिता बनी रहे। इसमें उन्होंने उत्तराखंड राज्य के राजकीय मेडिकल कालेजों में ऐसिटेंट प्राफेसरों के रिक्त 339 पदों पर गहन पड़ताल की है। उन्होंने एक चिकित्सक दम्पत्ति का उदाहरण देते हुए शासन को स्पष्ट किया है कि पहाड़ आने के एक योग्य डाक्टर दम्पत्ति को चयन के बाद भी 3 माह तक नियुक्ति न मिलने पर वह अन्य राज्य चले गए। सीएम हेल्प लाईन में प्रमाणित दस्तावेजों के साथ शिकायत कर उन्होंने फिलहाल इस चयन प्रक्रिया तक पारदर्शिता का तंत्र विकसित कर लिया है।
संजय पांडे ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की वेटिंग लिस्ट एवं राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को रिजल्ट के संबंध पारदर्शिता की प्रणाली स्थापित करने में सफलता अर्जित की है। अब प्रदेश के चारों राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को सहायक प्राध्यापक मिलने से न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाएगा संजय पाण्डे ने बताया कि राज्य के सभी राजकीय चिकित्सा शिक्षा संस्थान द्वारा संकाय सदस्यों के साक्षात्कार की विज्ञप्ति तो वेबसाइट पर ऑनलाइन डाली जाती थी परंतु साक्षात्कार का परिणाम कभी भी संबंधित राजकीय चिकित्सा संस्थान द्वारा उनकी वेबसाइट पर ऑनलाइन ही डाला जाता था। इसकी वजह से उनके एक परिचित विशेषज्ञ डॉक्टर अयान शर्मा (जनरल सर्जरी) का असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन होने के पश्चात भी अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने उन्हें तीन माह तक इस बारे में सूचित नहीं किया जबकि ना केवल वो बल्कि उनकी पत्नी जो की स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में ज्वाइन होकर पहाड़ में से सेवा देने हेतु इच्छुक थे। परंतु जॉब इंटरव्यू के पश्चात तीन माह का समय बीत गया तो हताश होकर उन दोनों ने कहीं और ज्वाइन कर लिया। उन्होंने स्वयं चिकित्सक के बात कर अल्मोड़ा मेडिकल कालेज के प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा से मुलाकात की लेकिन वे उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाए। उन्होंने इस संबंध में नवंबर दिसंबर 2023 में राज्य के चारों मेडिकल कॉलेज के विरूद्ध शिकायत दर्ज करवाई, इस प्रक्रिया के दौरान कई बार उनका वाद विवाद भी हुआ परंतु अंत में निदेशालय द्वारा चारों राजकीय चिकित्सा संस्थानों को आदेश जारी हुआ है कि संकाय सदस्यों के साक्षात्कार के उपरांत शासन स्तर से निर्गत चयन परिणामों की प्रति को प्रत्येक संस्थान अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी सा-समय अपलोड करना सुनिश्चित करेंगे।


उन्होंने प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों खासकर हरिद्वार में भी राजकीय चिकित्सालय में अभी तक संकाय सदस्यों की नियुक्ति न होने पर चिंता जताई और कहा. की जब संकाय सदस्य ही नहीं है तो MBBS के विद्यार्थी कैसे दाख़िला लेंगी तो पहले संकाय सदस्य आएंगे फिर MBBS के विद्यार्थी आएंगे तब जाकर पढ़ाई चालू होगी।
अभी तो पढ़ाई कैसे प्रभावित है, क्योंकि पढ़ाई प्रभावित होने के लिए संकाय सदस्यों का होना ज़रूरी है और उसके बाद स्टूडेंट्स आएंगे। इस लचर कार्य प्रणाली से नए मेडिकल छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। उन्होंने इसके साथ ही निचले स्तर पर आउटसोर्सिग अथवा कंपनी सिस्टम में राजनीतिक रसूकदारों के चहेतों को विभिन्न पदों पर भरने की भी जांच के लिए संघर्ष करने के साथ ही अल्मोड़ा से मरीजों के अभी भी सामान्य होने पर भी रैफर होने पर चिंता जताई।

swati tewari

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