तिरुमला तिरुपति देवस्थानम का सोना अब 11,000 करोड़ रुपये से अधिक रिकॉर्ड स्तर पर

भारत में सोने की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के साथ ही तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) का सोना अब 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है। 11,329 किलोग्राम सोना बैंकों में जमा है जबकि करीब 500 किलो सोने के आभूषण मंदिर की मूर्तियों की शोभा बढ़ा रहे हैं। आस्था और वित्त का यह अनोखा मेल TTD को न सिर्फ धार्मिक संस्थानों में सबसे समृद्ध बनाता है, बल्कि इसकी संपत्ति लगातार बढ़ रही है।

भक्तों की भेंट से हर साल जमा हो रहा है सोना

हर साल भक्त श्रीवारी हुंडी में 800 से 1,000 किलोग्राम सोने की भेंट चढ़ाते हैं। इनमें कई बार पूरा जेवर सेट भी शामिल होता है जिसे श्रद्धा से दान किया जाता है। यह सोना एकत्र करने के बाद शुद्ध किया जाता है, पिघलाकर बिस्किट में बदला जाता है और फिर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक जैसी सार्वजनिक बैंकों में लंबी अवधि की योजनाओं के तहत जमा कर दिया जाता है। केंद्र सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के तहत 2015 से अब तक TTD इन जमाओं पर सालाना 2.5% ब्याज कमा रहा है। वित्तीय वर्ष 2023–24 में ही 1,031 किलोग्राम सोना जमा किया गया। अप्रैल 2025 में जब सोने की कीमत 98.24 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंची, तो TTD के जमा सोने का मूल्य 11,129 करोड़ रुपये हो गया, जिससे हर साल लगभग 278 करोड़ रुपये का ब्याज मिल रहा है।

पूजा-अर्चना में उपयोग होने वाले आभूषणों की भी बड़ी भूमिका

बैंकों में जमा सोने के अलावा TTD के पास करीब 500 किलोग्राम सोना मंदिर की मूर्तियों के आभूषणों के रूप में है, जिनका उपयोग रोजाना की पूजा और प्रमुख पर्व-त्योहारों में होता है। ये आभूषण भगवान श्रीवेंकटेश्वर और उत्सव मूर्तियों को पहनाए जाते हैं और इनमें मुकुट, तलवारें, हार और विशेष प्रतीक शामिल होते हैं। जो भक्त बड़े आभूषण चढ़ाना चाहते हैं, वे पहले TTD से संपर्क करते हैं और मंदिर की आवश्यकताओं के अनुसार आभूषण की बनावट, रत्न और आकार आदि की जानकारी प्राप्त करते हैं। इसके अनुसार आभूषण तैयार करवाकर श्रद्धापूर्वक मंदिर को अर्पित किए जाते हैं। हाल ही में ऐसी ही एक भेंट में पूर्व TTD अध्यक्ष डीके अधिकेशव नायडू की पोती तेजस्वी ने एक दुर्लभ ‘विजयंती माला’ भेंट की, जिसकी कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक थी।

TTD के पास मौजूद सोना अप्रैल 2024 में जहां करीब 8,500 करोड़ रुपये का था, वहीं अप्रैल 2025 में सोने की कीमतों में 30% उछाल के चलते इसकी कीमत बढ़कर 11,129 करोड़ रुपये हो गई है। यह संस्था न केवल एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है, बल्कि अब एक सशक्त वित्तीय इकाई के रूप में भी उभर रही है।

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