चारधाम यात्रा के समय पिछले सालों को तरह इस वर्ष भी पशु क्रूरता दिखने को मिल रही हैं। केदारनाथ धाम की यात्रा में प्रथम चरण में रुद्रप्रयाग जनपद के घोड़े-खच्चर संचालकों को ही अनुमति मिली थी, लेकिन विरोध के बाद अब चमोली और टिहरी जनपद के जिलों के घोड़े-खच्चर संचालकों को भी धाम तक जाने की स्वीकृति मिल गई है।
अब तक पैदल यात्रा मार्ग पर नियमों की अनदेखी करने वाले 123 से अधिक घोड़े-खच्चर संचालकों के चालान किये गये हैं, जबकि पशु क्रूरता करने वाले तीन घोड़े-खच्चर संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 25 अप्रैल से अभी तक पैदल मार्ग पर संचालित होने वाले 16 घोड़े-खच्चरों की मौतें हुई हैं। घोड़े-खच्चरों की मौत का यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में बेहद कम बताया जा रहा है। इस बार घोड़े-खच्चरों पर निगरानी रखने के लिये 30 सदस्यीय म्यूल टास्क फोर्स, सात पशु चिकित्सक और सात पैरावेट (सहायक) की तैनाती की गई है। इसके अलावा पैदल मार्ग के 18 स्थानों पर घोड़े-खच्चरों के लिये गर्म पानी की व्यवस्था की गई है। अभी तक 8,320 घोड़े-खच्चरों का उपचार किया गया है, जबकि 441 घोड़े-खच्चर अनफिट पाये गये हैं, जिन्हें वापस भेजा गया है। नियमों के विरुद्ध घोड़े-खच्चरों का संचालन करने वाले 123 से अधिक लोगों का चालान किया गया है, जबकि पशु क्रूरता के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं।
वहीँ जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि घोड़े-खच्चरों का संचालन इस बार सीमित संख्या में किया जा रहा है। रोटेशन के अनुसार ही घोड़े-खच्चरों की आवाजाही करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जगह-जगह घोड़े-खच्चरों के लिये पैदल मार्ग पर गर्म पानी के अलावा पशु चिकित्सकों की तैनाती की गई है।
गौर करने वाली बात यह है कि इस बार घोड़े-खच्चरों की मौतें कम हुई हैं।
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