राज्य स्थापना दिवस: काफी संघर्षों के बाद बना स्वर्ग से सुंदर देवभूमि उत्तराखंड

प्रस्तुति- प्रताप सिंह नेगी

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस हर साल नवंबर में तीन नवंबर से नौ नवंबर तक उत्तराखंड अलग अलग जगहों पर बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उत्तराखंड राज्य की स्थापना 9 नवंबर सन् 2000 को यूपी अलग 27वे राज्य के नाम से उत्तर के आंचल कह जाने वाले उत्तराचंल के नाम उत्तरांचल प्रदेश था।

सन् 2000से सन् 2007तक उत्तराखंड का नाम उत्तरांचल था बाद में जनवरी 2007मे उत्तराखंड राज्य के नाम रख कर उत्तराखंड राज्य देश के 27वे राज्य के नाम जाना जाता है।

उत्तराखण्ड प्राचीन पौराणिक शब्द भी है जो हिमालय के मध्य फैलाव के लिए प्रयुक्त किया जाता था। उत्तराखंड को पुराणों, उपनिषदों एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों में पूर्ण भूमि, ऋषि भूमि तथा पवित्र क्षेत्र भी कहा गया है।

उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्रों से महिलाओं व युवाओं व बुजुर्गो कई आंदोलन कारी लोगों ने 28साल तक संघर्ष किया कई बार दिल्ली जंतर-मंतर लंबे समय तक अनिश्चितकालीन धरने प्रदर्शन किये।

सन् 1994 में 1सितबर में सबसे पहले खटीमा में उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए आंदोलन कारियों पर तत्कालीन सरकार यूपी के शासन प्रशासन ने लाठीचार्ज व गोलियां चलाकर उतराखड प्रथक राज्य के आंदोलन कारियों को घायल किया जिसमें कुछ निर्दोष लोग शहीद हुए। उसके बाद 2सितबर को इन शहीदों के आक्रोश में मंसूरी में आंदोलन कारियों ने यूपी तत्कालीन सरकार के खिलाफ लाठीचार्ज व बिना बताए गोलियां चलाई जाने पर आंदोलन किया इसमें लोग शहीद हुए।फिर उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गो महिलाओं ने। आंदोलन कारियों के साथ 2अकटूवर दिल्ली जंतर-मंतर में उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए हजारों की संख्या वसो में रवना हुए। लेकिन 1अकटूवर की रात्रि को ही मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा पर कुमाऊं व गढ़वाल के बसों में जा रहे लोगों के लिए अत्याचार व हमारी महिलाओं के अभ्रद व्यवहार किया गया और आंदोलन कारियों पर पत्थर बाजी व गोलियां लाठी चार्ज किया गया जिसमें सैकड़ों लोग घायल हुए और कई लोग शहीद हुए। खटीमा गोली, मंसूरी गोली,व मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा कांड के बाद उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों के महिलाओं व बुजुर्गो व भूतपूर्व सैनिकों में आक्रोश इतना बड़ा दिल्ली जंतर-मंतर में उत्तराखंड प्रथक राज्य के अनिश्चितकालीन क़ालीन धरना प्रदर्शन पर बैठे रहे। वहीं से तत्कालीन केन्द्र सरकार को अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करते अवगत कराते गए।तब जाके तत्कालीन सरकार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने सन2000मे यूपी से अलग राज्य के नाम से उतरांचल राज्य की घोषणा की ।

उत्तराखंड राज्य के स्वगीर्य अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री जी का बहुत लगाव था उन्होंने अपने शासनकाल में उतरांचल राज्य की स्थापना की बाद सन 2007मे इसे उत्तराखंड का नाम दिया गया जो आज पूरे देशभर में उत्तराखंड को एक देवभूमि उत्तराखंड के नाम जाना जाता है।

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