अल्मोड़ा की सीवर लाइन एवं एस.टी.पी.योजना के निर्माण में हो रही लापरवाही के सम्बन्ध में तत्काल कार्यवाही करे सरकार-कर्नाटक

मांग की, कि निर्माणाधीन अल्मोडा नगरीय सीवर योजना का पुर्न निरीक्षण व तकनीकी जांच आई.आई.टी.रूडकी के विशेषज्ञों से करवायी जाय


उत्तराखण्ड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व दर्जामंत्री बिट्टू कर्नाटक ने आज जिलाधिकारी अल्मोडा के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को एक ज्ञापन प्रेषित कर उनके संज्ञान में लाया गया कि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में ढूंगाधारा-धारानौला क्षेत्र को छोडकर अभी तक सम्पूर्ण नगर क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं डाली गयी है । वर्ष 2000-2001 में तत्कालीन सरकार द्वारा अल्मोड़ा नगर के जाखनदेबी क्षेत्र के लिये सीवर लाइन को स्वीकृत किया गया था जिसका कार्य तद्समय तक निर्माणाधीन है । सीवर लाइन का निर्माण कार्य पेयजल निगम द्वारा किया जा रहा है । वर्तमान में जाखनदेबी क्षेत्र के सीवर लाईन हेतु एस.टी.पी.का निर्माण किया जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि आज अल्मोड़ा नगर की जनसंख्या पूर्व की जनसंख्या से चार गुनी से अधिक हो चुकी है। तदुपरान्त भी वही 6 इंच के पाईप पूर्व से डाले जा रहे हैं, जिन्हें आबादी की क्षमतानुसार बढाया जाना होगा तथा सीवर ट्रिटमैंट प्लांट भी इसी प्रकार से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एवं अधिक क्षमता का होना चाहिये। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुये बताया कि एस.टी.पी.को आबादी क्षेत्र से काफी दूर बनाया जाता है किन्तु यह अल्मोड़ा नगर का दुर्भाग्य है कि निर्माणाधीन जाखनदेबी क्षेत्र के लिये एस.टी.पी.रिहायशी क्षेत्रों के समीप बनाया जा रहा है।

कर्नाटक ने कहा कि इस सीवर योजना का निर्माण केवल खानापूर्ति के लिये किया जा रहा है क्योंकि वर्ष 2000 के निर्माणाधीन मानक तथा वर्तमान आबादी को देखते हुये क्षमतानुसार पाईप नहीं डाले जा रहे हैं तथा एस.टी.पी.भी नगर में पाण्डेखोला, धारकीतूनी, लक्ष्मेश्वर,कर्नाटक खोला,विकास भवन,रैखोली,अथरमणी आदि क्षेत्रों के मध्य में निर्माण किया जा रहा है । इस स्थान पर सीवर ट्रिटमैंट प्लांट बनाये जाने से यह क्षेत्र प्रदूषित होगा और अनकों बीमारियां फैला सकता है । जो स्थानीय जनता के जीवन के साथ स्पष्ट खिलवाड़ है जिसका दुष्परिणाम आने वाले वर्षो में भी इस क्षेत्र के लोगों को भुगतना होगा । उन्होंने मांग की कि निर्माणाधीन अल्मोडा नगरीय सीवर योजना का पुर्न निरीक्षण व तकनीकी जांच आई.आई.टी.रूडकी के विशेषज्ञों से करवायी जाय ताकि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पुनः सर्वेक्षण कर उक्त योजना में व्यय हो रही सरकारी धनराशि का सदुपयोग किया जा सके और नगर क्षेत्र को सीवर लाईन का लाभ प्राप्त हो सके ।
उन्होंने चेतावनी देते हुये कहा कि यदि निर्माणाधीन सीवर ट्रिटमैंट प्लान को रिहायशी क्षेत्रों से दूर नहीं बनाया जाता है,सीवर लाइन में वर्तमान आबादी के अनुसार पाईप नहीं लगाये जाते हैं तथा इसकी जांच आई.आई.टी.रूड़़की के विशेषज्ञों से नहीं करवायी जाती है तो उन्हें स्थानीय जनता के साथ विवश होकर उग्र आन्दोलन को बाध्य होना पडेगा जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार एवं सम्बन्धित विभाग की होगी ।

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