उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति और लोकायुक्त की संस्था को सुव्यवस्थित करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
“उत्तराखंड राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति” एवं लोकायुक्त संस्थान को सुचारू किए जाने की प्रार्थना के साथ गौलापार निवासी “रविशंकर जोशी” के द्वारा दायर करी गई जनहित याचिका में आज उच्च न्यायालय, नैनीताल में सुनवाई हुई।
याची “रविशंकर जोशी” द्वारा न्यायालय को बताया गया कि लोकायुक्त संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं परंतु प्रदेश सरकार द्वारा आज तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई है। याची द्वारा बताया गया कर्नाटक में तथा मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जा रही है परंतु उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन साधी की खंडपीठ ने शुक्रवार को उत्तराखंड की राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में अपना जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने सरकार को एक अतिरिक्त हलफनामे के जरिए यह भी बताने का आदेश दिया है कि उसने लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए जब तक क्या किया है। शपथ पत्र में संस्थान के गठन से लेकर 31 मार्च 2023 तक हुए व्यय का वर्षवार विवरण प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी।
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