उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला
कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति बने जगदीप धनखड़
धनखड़ ने साल 2022 में 14वें उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इस दौरान उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने कहा कि उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू होगा और उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे पत्र में खराब स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत इस्तीफा दिया। इस्तीफे में उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्हें जो सम्मान, विश्वास और स्नेह मिला, वह जीवनभर उनके दिल में संचित रहेगा।
74 वर्षीय नेता ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह “सही समय” पर, “ईश्वरीय कृपा” के अधीन, सेवानिवृत्त हो जाएँगे। विपक्षी कांग्रेस ने टिप्पणी की कि उनके इस्तीफे में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज़्यादा है।
राजस्थान के एक छोटे से गांव किठाना में एक किसान परिवार में जन्मे धनखड़ की देश के दूसरे सबसे बड़े पद तक की। चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल और बाद में राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे वे राजनीति में आने से पहले राजस्थान उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में वकील बने। पी.वी. नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते हुए श्री धनखड़ कांग्रेस का हिस्सा थे, लेकिन राजस्थान में अशोक गहलोत के उदय के साथ ही वे भाजपा में शामिल हो गए और चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली सरकार में कुछ समय के लिए मंत्री भी रहे।
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