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श्रीहरि का शयनकाल पूरा। आज है देवोत्थान एकादशी, मंगल कार्यों की होगी शुरुआत, पर विवाह के मुहूर्त नहीं

dev uthani ekadashi vrat – ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः , आज देवोत्थान एकादशी हैं। श्रीहरि का शयनकाल खत्म हो गया हैं । इस बार देवोत्थान एकादशी पर विवाह के मुहूर्त नहीं है।मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी लेकिन इस बार देवोत्थान एकादशी पर शादी का मुहूर्त नहीं बन रहा है क्योंकि इस दिन तक शुक्र अस्त रहेंगे और विवाह आदि शुभ कार्य में शुक्र उदय होना जरूरी है। शुक्र अस्त होने के कारण शहनाई गूंजने में अड़चनें हैं। शुक्र उदय होने के बाद नवंबर और दिसंबर में भी शादियों के कम संयोग हैं। इस बार देवोत्थान एकादशी पर विवाह के मुहूर्त नहीं है। शुक्र अस्त होने के कारण शहनाई गूंजने में अड़चनें हैं। शुक्र उदय होने के बाद नवंबर और दिसंबर में भी शादियों के कम संयोग हैं।

शादियों के कम मुहूर्त का सीधा असर मैरेज हाल से लेकर डीजे, ढोल और बैंड तक सभी कारोबार पर पड़ेगा। कपड़ा व सराफा कारोबारी भी इसको लेकर खासे चिंतित हैं।पंडित अवधेश मिश्र ने बताया कि विवाह के मामले में ग्रह-नक्षत्रों और सितारों की स्थितियों को देखकर ही शादी के मुहूर्त तय किए जाते हैं। देवोत्थान एकादशी आज चार नवंबर को है। इसी के साथ भगवान श्रीहरि का शयनकाल खत्म हो जाएगा। मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी लेकिन इस बार देवोत्थान एकादशी पर शादी का मुहूर्त नहीं बन रहा है क्योंकि इस दिन तक शुक्र अस्त रहेंगे और विवाह आदि शुभ कार्य में शुक्र उदय होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर तक शुक्र अस्त रहेंगे। 27 नवंबर को उनका उदय होगा और 28 नवंबर से शहनाई गूंजेगी। दिसंबर माह में शादियों के शुभ मुहूर्त भी कम हैं। दिसंबर में 14 दिसंबर तक ही शादियां होंगी। इसके बाद एक माह के लिए शहनाई की गूंज शांत हो जाएगी। 15 जनवरी से फिर शादियों का सीजन शुरू होगा।

This post was published on 04/11/2022 2:34 AM

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