कुमाऊं के प्रसिद्ध लोकगायक स्वर्गीय पप्पू कार्की के परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें पप्पू कार्की के आश्रितों को 90 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने यह आदेश ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनाया। कंपनी ने अधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मृतक लोकगायक के परिवार—पत्नी कविता कार्की और अन्य आश्रितों—के पक्ष में ₹90,01,776 का मुआवजा तय किया गया था।यह मामला 9 जून 2018 को हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पप्पू कार्की अपने साथियों के साथ गौनियारो-हैड़ाखान से हल्द्वानी लौट रहे थे, जब उनकी कार ग्राम मुरकुड़िया के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी। इस हादसे में कार चालक और खुद पप्पू कार्की की मौके पर ही मौत हो गई थी।
बीमा कंपनी ने तर्क दिया था कि मृतक की आय का आकलन गलत तरीके से किया गया है क्योंकि अधिकरण ने उनकी मृत्यु के बाद दाखिल किए गए आयकर रिटर्न को आधार बनाया है। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि दुर्घटना किसी जंगली जानवर को बचाने के प्रयास में हुई थी, न कि चालक की लापरवाही से।वहीं, मृतक के परिजनों की ओर से दलील दी गई कि जिन आयकर रिटर्न पर विचार किया गया, वे आकलन वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के हैं — यानी यह दुर्घटना से पहले की वैध आय का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आयकर रिटर्न वैधानिक दस्तावेज हैं जिन्हें केवल दाखिल करने की तिथि के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।हाईकोर्ट ने परिजनों के तर्क को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी की अपील को सिरे से खारिज कर दिया और अधिकरण के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही अब पप्पू कार्की के परिवार को 90 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का रास्ता साफ हो गया है।
लोकगायक पप्पू कार्की अपने मधुर स्वर और पहाड़ी लोकगीतों से युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय थे। उनकी असमय मौत से उत्तराखंड के लोकसंगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा था।
This post was published on 08/10/2025 9:29 AM