अल्मोड़ा। रेफरल प्रकरणों की समीक्षा के लिए गठित रेफरल मॉनिटरिंग समिति की प्रथम बैठक जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में जिला कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न अस्पतालों से प्राप्त रेफरल मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों के उपचार में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि रेफर किए गए प्रत्येक मरीज की स्थिति का अपडेट रेफरल के बाद भी लिया जाए, ताकि मरीज को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके।
डीएम सिंह ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा 108 एम्बुलेंस सेवा और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए, जिससे समय पर मरीजों को एम्बुलेंस उपलब्ध हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि जच्चा-बच्चा से जुड़े सभी मामलों का सुव्यवस्थित डेटा तैयार रखा जाए।
बैठक में रेफरल प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभागीय संचार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डीएम ने कहा कि निरंतर मॉनिटरिंग और सुदृढ़ फीडबैक सिस्टम से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि 1 नवंबर 2025 से 23 नवंबर 2025 तक रेफरल मामलों की दर ओपीडी मरीजों की तुलना में एक प्रतिशत से भी कम रही है।जिलाधिकारी ने कहा कि मरीज को रेफर करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि रेफर किए जाने वाले अस्पताल में उसका उपचार संभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी मरीज के इलाज में लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्र तिवारी, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, पीएमएस जिला अस्पताल डॉ. हरीश चंद्र गढ़कोटी सहित सभी संबंधित अधिकारी तथा वर्चुअली विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्साधिकारी शामिल रहे।
This post was published on 26/11/2025 12:03 PM