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    अल्मोड़ा में जल्द बने हार्ट केयर यूनिट,विधायक मनोज तिवारी की सरकार से मांग l

    manoj tiwari vidhyak almora

    अल्मोड़ा-अल्मोड़ा में हार्ट केयर यूनिट की मांग को लेकर विधायक मनोज तिवारी ने एक बार फिर पूर्व में संचालित सुविधाओं का जिक्र करते हुए वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब वे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान विधायक थे, तब उनके प्रयासों से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से वार्ता कर वर्ष 2014 में अल्मोड़ा में हार्ट केयर यूनिट की स्थापना कराई गई थी।विधायक ने बताया कि दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट से एम ओ यू साइन किया गया था तथा वरिष्ठ हार्ट सर्जन डॉ ओ पी यादव अपनी सेवाएं दे रहे थे और स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा था। इससे न केवल गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल पाता था, बल्कि उन्हें बाहर रेफर करने की आवश्यकता भी कम हो गई थी।
    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद इस महत्वपूर्ण हार्ट केयर यूनिट को बंद कर दिया गया, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उनका कहना है कि इस फैसले के कारण मरीजों को एक बार फिर दूरदराज के शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जो कई बार उनके लिए जोखिम भरा साबित होता है।अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी ने मेडिकल कॉलेज में पुनः अत्याधुनिक हार्ट केयर यूनिट/ कैथ लैब स्थापित करने की जोरदार मांग उठाई है।उन्होंने इसे जनहित से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में हृदय रोगियों के लिए समय पर उपचार मिलना अक्सर चुनौती बन जाता है जिससे कई अनमोल जिंदगियां असमय ही बुझ जाती हैं।विधायक ने कहा कि अल्मोड़ा और आसपास के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले मरीजों को गंभीर स्थिति में हल्द्वानी या देहरादून जैसे शहरों की ओर रेफर किया जाता है। लंबी दूरी,खराब सड़कें और समय की कमी कई बार मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती हैं।उन्होंने कहा कि जब कोई परिवार अपने प्रियजन को केवल इसलिए खो देता है क्योंकि समय पर इलाज नहीं मिल पाया, तो यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों का टूटना होता है।उन्होंने सरकार से मांग की कि मेडिकल कॉलेज में जल्द से जल्द हार्ट केयर यूनिट/ कैथ लैब स्थापित कर इसे पूरी तरह क्रियाशील बनाया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।इसके साथ ही उन्होंने विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति,आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती पर भी जोर दिया।इस मांग को लेकर आम जनता में भी खासा समर्थन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कहा कि हमारे अपने लोग सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि इलाज दूर है।अगर यहां हार्ट यूनिट बनती है तो यह हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण होगी। विधायक ने कहा कि यदि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में हार्ट केयर यूनिट/कैथ लैब स्थापित होती है तो न केवल अल्मोड़ा बल्कि बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे जिलों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।इससे रेफरल का दबाव कम होगा और समय पर उपचार संभव हो सकेगा।विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि जनभावनाओं की आवाज है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द बजट स्वीकृत कर कार्य शुरू कराया जाए।उन्होंने कहा कि हर धड़कन की कीमत होती है।अगर हम समय रहते कदम उठाएं तो कई घरों की खुशियां बचाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हमेशा से एक चुनौती रहा है।भौगोलिक परिस्थितियां, संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को अक्सर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में हार्ट केयर यूनिट की स्थापना एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
    हृदय रोग आज तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है। बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों के कारण युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि
    कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां मरीज को समय पर उपचार नहीं मिल पाया और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ऐसे हादसे केवल आंकड़े नहीं होते, बल्कि हर एक घटना के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, अधूरे सपने और बिखरती उम्मीदें होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज न केवल एक उपचार केंद्र बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र के लिए जीवनरक्षक संस्थान बन सकता है।इससे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी ऊंचा होगा और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। विधायक ने कहा कि अल्मोड़ा में हार्ट केयर यूनिट की मांग केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि हजारों जिंदगियों से जुड़ी संवेदनशील पहल है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पुकार को कितनी गंभीरता से लेती है और कब तक पहाड़ों में धड़कनों को सुरक्षित करने की यह उम्मीद हकीकत बनती है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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