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    अस्पताल में गंदगी, अधिकारी नदारद और लापरवाही चरम पर — सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने उजागर की स्वास्थ्य विभाग की असंवेदनशीलता

     

    अस्पताल में गंदगी, अधिकारी नदारद और लापरवाही चरम पर — सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने उजागर की स्वास्थ्य विभाग की असंवेदनशीलता

    अल्मोड़ा के जनसेवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने आज गोविंद सिंह माहरा राजकीय नागरिक चिकित्सालय का अचानक निरीक्षण किया, जहां उन्हें स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त मिली। वार्डों और परिसर की अव्यवस्था इतनी गंभीर थी कि उन्होंने तत्काल इसका वीडियो रिकॉर्ड कर मामले की जानकारी प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश पुरोहित को फोन पर दी।

    https://youtube.com/shorts/zAjhGZ2gjDQ?feature=shared

    डॉ. पुरोहित ने संजय पाण्डे को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.के. वर्मा से संपर्क करने को कहा। लेकिन जब वे उनके कक्ष में पहुंचे तो डॉ. वर्मा अनुपस्थित पाए गए।
    स्थिति को समझने हेतु संजय पाण्डे ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गजेन्द्र सिंह बिष्ट से बातचीत की तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का संपर्क नंबर प्राप्त किया।स्थिति को समझने हेतु संजय पाण्डे ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गजेन्द्र सिंह बिष्ट से बातचीत की तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का संपर्क नंबर प्राप्त किया।

    कॉल लगातार व्यस्त — जवाबदेही से बचने का संदेह*
    मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के नंबर 9760794088 पर कई बार कॉल करने के बावजूद फोन लगातार व्यस्त मिला। यहां तक कि दूसरे नंबर से कॉल करने पर भी यही स्थिति रही।
    इससे यह गंभीर आशंका पैदा हुई कि कहीं जिम्मेदारी से बचने के लिए फोन फॉरवर्ड तो नहीं किया गया?

    बाद में जानकारी मिली कि डॉ. वर्मा की आंख का ऑपरेशन हुआ है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी अनुपस्थिति में किसी भी अधिकारी को वैकल्पिक जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी गई?यदि किसी मरीज के साथ आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाती, तो वह किससे संपर्क करता?
    *प्रभारी सीएमओ का आज सुबह दौरा — फिर गंदगी क्यों नहीं दिखी?*
    संजय पाण्डे ने यह भी प्रश्न उठाया कि आज सुबह ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया था, फिर भी इतनी गंदगी और अव्यवस्था उनकी नजरों से कैसे बच गई?
    क्या यह दौरा मात्र औपचारिकता निभाने के लिए किया गया?

    अस्पताल में 3 बजे तक सन्नाटा — प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा प्रमाण
    घटनास्थल पर मौजूदगी के दौरान संजय पाण्डे ने पाया कि दोपहर 3 बजे से पहले ही अस्पताल लगभग सुनसान हो चुका था।
    कोई वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं था और शिकायत करने पर भी प्रशासन की ओर से किसी ने संपर्क करना उचित नहीं समझा, जो मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
    अस्पताल सेवा का स्थान है, लापरवाही का नहीं” — संजय पाण्डे
    संजय पाण्डे ने कहा:
    “अस्पताल वह स्थान है जहां लोगों के जीवन की रक्षा होती है। अगर अधिकारी ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेंगे, तो आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? मैं इस पूरे मामले को उच्च प्रशासन के समक्ष उठाऊंगा ताकि दोष तय हो और तत्काल सुधार हो।”

    By D S Sijwali

    Work on Mass Media since 2002 ........

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