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    छठे विश्व आपदा प्रबंधन घोषणा पत्र-2023; पर्वतीय राज्यों के युवाओं को आपदा प्रबंधन की दिशा में विशेष रूप से तैयार करने पर दिया जोर

    छठे विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन में देहरादून घोषणा पत्र-2023 जारी किया गया। इसमे आपदा सम्मुख लचीलेपन की तैयारी को सुदृढ़ बनाने की बात कही गई है। घोषणा पत्र में पर्वतीय राज्यों के युवाओं को आपदा प्रबंधन की दिशा में विशेष रूप से तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    इसमें यह भी कहा गया है कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों के सामने आने वाले विशिष्ट जोखिमों के बारे में उन्हें शिक्षित कर आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार करना आवश्यक है।

    घोषणा पत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम करने वाली नीतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है।

    विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड और आपदा का मानो चोली-दामन का साथ है। राज्य गठन के बाद से अब तक के परिदृश्य को देखें तो हर साल ही प्राकृतिक आपदाओं में जान-माल की क्षति झेलनी पड़ रही है। इस वर्ष भी जनवरी में जोशीमठ में भूधंसाव की आपदा के बाद से राज्य अब तक लगातार ही आपदा से जूझ रहा है। वर्षाकाल में ही अतिवृष्टि व भूस्खलन ने जानमाल को भारी नुकसान पहुंचाया और आपदा में 119 व्यक्तियों की जान चली गई, जबकि 50 के लगभग घायल हुए और 16 अभी लापता हैं। इसके अलावा पशुधन, भवन समेत सार्वजनिक संपत्ति को लगभग 1400 करोड़ की क्षति की आंकी गई।

    राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा है कि आपदा की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उनका सामना करने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। वे देहरादून में आपदा प्रबंधन पर आयोजित विश्व कांग्रेस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल ने कहा कि इस सम्मेलन से उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन व जलवायु परिवर्तन के अंतर्राष्ट्रीय शोध एवं समाधान केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से निकले निष्कर्षों का लाभ पूरे विश्व को होगा।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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