उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के अगस्तमुनी विकास खंड छिनका ग्राम पंचायत में मोटे अनाजों को औषधि माना जाता है इसलिए सजन गुसाई की अध्यक्षता में महिला समूह ने एक बैठक आयोजित की इस बैठक में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मोटे अनाजों के बारे में बताया ये मोटे अनाज उत्तराखंड के लोगों के लिए किस तरह से लाभदायक होते हैं और किस प्रकार इन अनाजों का सेवन किया जाता है।
झंगोरा की खीर,व कड़ी व भात भी खाया जाता है,गहत की दाल सर्दियों में ज़्यादातर सेवन किया जाता है। सोयाबीन व भट्ट की दाल, भट्ट की चुरकाडी (कुमाऊं भाषा में भटक डुबक भी) कहा जाता है। सजन गुसाई ने बताया उत्तराखंड में आज से पचास साल पहले , झींगोरा, कोदा, कौड़ी, ज्वार बाजरा, भट्ट, गहत, सोयाबीन पर्वतीय क्षेत्रों में कुमाऊं गढ़वाल के हर जगहो पर बोया जाता था। लेकिन समय के अभाव व उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों के जगह जगह से पलायन होने से इन मोटे अनाजों की उपज बहुत कम होते जा रही है।
इसलिए सजन गुसाई ने अपने छिनका ग्राम पंचायत में महिला समूह के साथ मोटे अनाज व दालों के बारे जानकारी व फायदे के लिए एक बैठक रखी है।इस बैठक में हमारे कुमाऊं गढ़वाल में किस तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्यवर्धक औषधि के काम आते। झंगोरा का भात ब्लडप्रेशर,सुगर व दिल के बिमारियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।गहत की दाल का सेवन करने से किडनी में स्टोन (पथरी ) खांसी जुखाम, डायरिया या दस्त,पेट के कब्ज के लिए फायदेमंद सोयाबीन बीन व भट्ट सोयाबीन व काले भट्ट दाल व भट्ट की चुरकाडी के साथ-साथ यह पोषक तत्वों का खजाना है।
सोयाबीन का तेल भी बनाया जाता है, इधर सोयाबीन को रात्रि को भिगाकर सुबह सुबह प्रातः काल एक एक दो मुट्ठी रोज़ खाने से कई प्रकार के विटामिन व प्रोटीन मिलते है। हडि्डयों को कमजोर होने से रोकने में सोयाबीन का सेवन करने से काफी फायदेमंद होता है।इन मोटे अनाजों में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन आयोडीन जिंक,वसा, बीटामीन बी, फास्फोरस, आयरन, आयोडीन आदि पर्याप्त मात्रा मिलता है।
इस बैठक में सजन गुसाई, लोकगायिका सीमा गुसाई, सुलोचना देवी, गुड्डी बिष्ट, गुड्डी देवी, मीरा देवी, रेखा देवी, लक्ष्मी देवी, उषा देवी, अल्पना देवी, सरिता देवी आदि मौजूद रहे।
