इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर लोक असमंजस में है। जन्माष्टमी महापर्व 6 सितंबर को मनाया जाएगा लेकिन कुछ ज्योतिषी व शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी 7सितबर को भी मनाई जायेगी। शैव संप्रदाय के लोग 6 सितबर को मनायेंगे वैष्णव सम्प्रदाय के लोग 7 तारीख को मनायेंगे।
वैदिक पंचांग के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 6 सितंबर 2023 दिन बुधवार को दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से आरंभ होगी और 7 सितंबर 2013 दिन गुरुवार को शाम 04 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं भगवान का जन्म रात्रि के 12 बजे हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी 6 सितंबर को मनाई जाएगी।
धर्म ग्रंथों के अनुसार कृष्ण का जन्म रात में हुआ था इसलिए ये उत्सव रात जन्माष्टमी पर रात्रि श्री कृष्ण की पूजा का विधान है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 01 मिनट से शुरू होकर 1 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा
भगवान श्रीकृष्ण के नाम से द्वापर युग में कंस के द्बारा अत्याचार व अधर्म को रोकने के लिए भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी के दिन जन्म हुआ था।
मथुरा में उग्रसेन का पुत्र कंस जिसका पूर्व जन्म में कालनेमि नाम बताया जाता है। कंस ने अपने अत्याचार व दुर्व्यवहार से अपने पिता को राज सिंहासन से उतारकर खुद राजा बन गया। इधर देवकी बहिन को बहुत स्नेह प्रेम करने वाला कंस अपनी बहिन की शादी की विदाई करते हुए सारथी बनकर देवकी बहिन व वासुदेव को रथ में बैठाकर विदा करने गया। आधे रास्ते में कंस को आकाशवाणी हुई हे कंस तू देवकी के आठवें संतान के द्वारा मारा जायेगा। कंस तब से भयभीत होकर देवकी व वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। कंस महाराज का कहना था अगर देवकी व वासुदेव को मार देता हूं तो पिता उग्रसेन मेरा बिरोध करेंगे। इसलिए देवकी को कारागार में डालकर हाथ में हथकड़ी लगाकर गेट में चौकीदार रखकर इसके आठवें पुत्र के द्बारा मौत का बदला ले सकू। कंस के द्वारा अपनी बहन देवकी व वासुदेव को एक ही कारागार में रखने का मकसद था। इसके आठवीं संतान को में कैसे मार सकू। भगवान विष्णु का अवतार कृष्ण भगवान जब पैदा हुए तब देवकी व वासुदेव के हाथ की हथकड़ी अपने आप खुल गयी। कारागार व गेट के प्रहरी सब सो गए।जब रात्रि में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तब विष्णु भगवान ने बोला हे वासुदेव में कृष्ण भगवान के रूप अवतारित हुआ। कंस के अत्याचार व अधर्म के लिए।आप इस आठवें बालक को माँ जसोदा के घर पर छोड आओ वहां कन्या हो रखी है उस कन्या को ले आओ। वासुदेव ने विष्णु जी का पालन करके पुत्र को उठाया रात्रि को यमुना पार गोकुल को चल पड़े। भादो का महीना था। रात्रि के एक बजे का समय था यमुना में पैर रखते ही बहने का डर था । लेकिन कृष्ण भगवान कोई साधारण मानव नहीं थे। द्बापर में सत्य की जीत के लिए विष्णु भगवान के अवतार थे।जब वासुदेव ने यमुना में पैर रखा तो शेषनाग ने छाया देकर व यमुना वैसे ही कम हो गई। वासुदेव रात्रि में गोकुल जाकर कृष्ण भगवान को जसोदा मां के पास छोड़कर आये वहां से उस कन्या को लेकर अपने कारागार में ले गए।
वह कन्या कोई साधारण बेटी नहीं थी व भी माया थी जब पहरेदार व कारागार के लोगों की नींद खुली तो उन्होंने कंस को बताया देवकी का आठवां संतान होगया।तब कंस ने उस बेटी को जमीन पटकर मारने की सोची तो लड़की आकाश चली उधर से आकाशवाणी हुई।हे कंस तू मुझे क्या मारेगा तेरा अधम व पाप अंत करने के लिए कृष्ण भगवान पैदा हो गए व गोकुल में है अब तेरा अंत नजदीक है।
तब से भगवान कृष्ण के मंदिरों और घर के मंदिरों को फूलों और पत्तों से सजाया जाता है, और घर में प्रसाद के रूप में दिए जाने से पहले देवता को मिठाइयाँ चढ़ाई जाती हैं (भगवान का बचा हुआ भोजन, जो उनके पक्ष को व्यक्त करता है)। पूरे देश में इसे काफी पसंद किया जाता है। यह दिन व्यापक रूप से बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। मथुरा जन्माष्टमी उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है क्योंकि यह भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है और लोग इसे बहुत खुशी के साथ मनाते हैं।
लेख: सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी

