छिनका गांव में आज भी हथ चक्की से आटा पीसाई व ओखिल से धान कुटाई की परंपरा जारी
रुद्रप्रयाग -अगस्तयमुनि विकास खंड के छिनका गांव में आज भी हथ चक्की के द्वारा आटा पीसाई व ओखिल से धान कुटाई की परंपरा जारी है।
आजकल के समय में तो घर घर, गांव गांव में धान कुटाई चक्की मसीन व आटा पिसाई की चक्की मशीन उपलब्ध हो गई है।
हाथ चक्की से आटा पीसाई ओखिल से धान कुटाई की प्रथा धीरे धीरे लुप्त होते जा रही है।
लेकिन रुद्रप्रयाग अगस्त्यमुनि विकास खंड के छिनका गांव में आज भी सीमा गुसाई लोकगायिका व उनके पति सजन सिंह गुसाईं व गुड्डी देवी व लक्ष्मी देवी के द्वारा हथ चक्की से आटा पीसाई व अन्य दालें दलने के लिए व ओखिल से धान कुटाई मडुवा झिंगुरा बजारा कुटाई होती रहती है।
सज्जन सिंह गुसाईं ने बताया हम लोग गेहूं की खेती के समय गेहूं के बाली के मुटठे बना कर अपने आंगन में सुखाते हैं। फिर चार दिनों के बाद अपने आंगन में गेहूं बाली के मुटठो को रखकर उस पर बैलों को घुमाते हैं। बैलों के घुमने गेहूं की बाली पिस जाती है उसके बाद गेहूं के बीज को निकालकर गेहूं तैयार हो जाता है।
प्रताप सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता ने छिनका गांव के लोगों की प्रसंशा करते हुए बताया आज भी हथ चक्की के द्वारा पिसाई व ओखिल के द्वारा कुटाई करने प्रथा को जिंदा रखा है।
दूसरी तरफ गेहूं की चुटाई के लिए बैलों को गेहूं बाली के ऊपर घूमा कर गेहूं का बीज निकालने की प्रथा आज भी प्रचलित है।
आज़ से पंद्रह-बीस साल पहले हम लोग यही हथ चक्की व यही ओखल से अपने शादी व्याह व अन्य पूजा पाठ अनुष्ठान में दाले दलते थे ओखिल से धान कुटाई, मडुवा झिंगुरा बजारा हल्दी धनिया जीरा मिर्च आदि कुटते थे।
आज़ के समय चक्कियां आ गई तो धीरे-धीरे हथ चक्की व ओखिल लुप्त हो रहे हैं।
लेकिन अगस्त्यमुनि विकास खंड के छिनका गांव में आज ये सब प्रचलित है।
