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    जो भ्रष्टाचार उजागर करे, वही कटघरे में खड़ा हो — तो फिर शासन किसके लिए है?”- RTI एक्टिविस्ट चंद्रशेखर जोशी

    ByD S Sijwali

    Jun 21, 2025

    RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी की भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक — लेकिन उत्तराखंड के सिस्टम को सच्चाई से अब भी परहेज़ है।
    “मैं एफिडेविट नहीं, जनता की आवाज़ लेकर आया हूं।
    अगर सच्चाई को दबाया जाएगा, तो यह आवाज़ और ऊंची होगी।”
    — चंद्रशेखर जोशी


    उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHealth) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ RTI एक्टिविस्ट चंद्रशेखर जोशी ने विजिलेंस विभाग को दस्तावेज़ों सहित ठोस शिकायत भेजी थी। उम्मीद थी कि त्वरित कार्रवाई होगी — लेकिन हकीकत ने हैरान कर दिया।
    ✔ विजिलेंस ने क्या किया?
    विजिलेंस ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और DGHealth को स्पष्ट निर्देश दिए:

    शिकायत का संज्ञान लें,
    नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करें,
    यदि कोई तथ्य सतर्कता जांच के योग्य हो, तो औचित्यपूर्ण प्रस्ताव शासन को भेजा जाए।
    ❌ लेकिन DGHealth ने क्या किया?
    न तो कोई जांच की,
    न कोई औचित्यपूर्ण प्रस्ताव भेजा,
    बल्कि शिकायत को सिरे से खारिज कर दिया और शिकायतकर्ता से ही एफिडेविट की मांग कर दी।
    ऐसा प्रतीत होता है जैसे अब सिस्टम की अघोषित नीति बन गई हो:


    ❗ “हम तो बिना एफिडेविट लिए भ्रष्टाचार की जांच नहीं करेंगे!”


    🔍 RTI के तहत उठाए गए 5 ज़रूरी सवाल:
    श्री जोशी ने विजिलेंस विभाग से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पांच सीधे प्रश्न पूछे:

    1-एफिडेविट की कानूनी अनिवार्यता किस आदेश पर आधारित है?
    2-क्या यह नियम सभी शिकायतों पर समान रूप से लागू होता है?
    3-अब तक कितनी शिकायतों में ऐसा एफिडेविट मांगा गया है?
    4-शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता तय करना प्रशासन का दायित्व है या नागरिक का?
    5-क्या विजिलेंस विभाग का प्रचार “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” और व्यवहार “एफिडेविट आधारित चुप्पी” एक विरोधाभास नहीं है?


    📌 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दर्ज हुई स्वतंत्र शिकायत


    शिकायत संख्या: LMS/2025/06/778185
    विभाग: चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
    स्थिति: Assigned
    जांच अधिकारी: डॉ. आर. राजेश कुमार,
    🇮🇳 अब यह मामला केवल राज्य का नहीं रहा
    चंद्रशेखर जोशीने जब देखा कि राज्य स्तर पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो रही,
    तो उन्होंने यह पूरा प्रकरण राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल को दस्तावेजों सहित भेज दिया।“जब राज्य व्यवस्था मौन हो जाए,
    तब लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता की अदालत ही सर्वोच्च होती है।”

    • अब यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं,
    हर जागरूक नागरिक की आवाज़ है
    जो चाहता है कि भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई हो
    जो चाहता है कि शिकायतकर्ता को डर नहीं, सम्मान और संरक्षण मिले
    जो चाहता है कि शासन जवाबदेह बने
    और “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” केवल नारा नहीं, नीति बने।
    • अब सवाल स्पष्ट है:
    • विजिलेंस ने कहा — “कार्रवाई करो”
    • DGHealth ने कहा — “एफिडेविट दो”
    • तो अब जवाब कौन देगा?

    By D S Sijwali

    Work on Mass Media since 2002 ........

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