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    पान मसाला उपकर विधेयक लोकसभा में पारित

    Byswati tewari

    Dec 9, 2025
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    पान मसाला उपकर विधेयक लोकसभा में पारित 

    भारत की लोकसभा ने एक महत्त्वपूर्ण पान मसाला उपकर विधेयक को मंज़ूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य रक्षा आधुनिकीकरण और राज्यों के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के लिए स्थायी और विश्वसनीय वित्तीय संसाधन तैयार करना है। सरकार का तर्क है कि यह नया उपकर, जो सीधे पान मसाला निर्माण इकाइयों पर लगाया जाएगा, न केवल शीघ्र समाप्त होने वाले पूर्व के उपकरों की भरपाई करेगा बल्कि लंबे समय तक राष्ट्रीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों के लिए स्थिर राजस्व उपलब्ध कराएगा।

    सरकार ने इस कदम को बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, रक्षा तैयारियों की अनिवार्यता और राज्यों पर बढ़ते स्वास्थ्य बोझ के बीच अत्यंत आवश्यक वित्तीय साधन बताया है।नव-पारित पान मसाला उपकर विधेयक एक विशेष उपकर का प्रावधान करता है जो पान मसाला और समान उत्पादों के निर्माण पर लगाया जाएगा। यह सिर्फ राजस्व संग्रह नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक पुनर्संरचना का हिस्सा है, जिसमें सरकार उन उत्पादों पर लक्षित कर लगा रही है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण माने जाते हैं। पहले लगाए जाने वाले जीएसटी मुआवजा उपकर के समाप्त होने के बाद, सरकार को राजस्व में संभावित कमी का अनुमान था, जिसके चलते यह उद्देश्यपूर्ण उपकर आवश्यक माना गया।

     

    वित्त मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि नया उपकर उपभोक्ताओं पर प्रत्यक्ष कर बोझ बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं लाया जा रहा है। इसके विपरीत, इसे निर्माण इकाइयों पर लगाया जाएगा ताकि उपभोग स्तर पर अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि न हो और प्रभाव मुख्यतः उद्योग तक सीमित रहे। इसके साथ ही यह संरचना उस वर्ग पर कर लगाने की नैतिक वैधता को भी स्थापित करती है, जो वर्षों से स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा रहा है। उपकर मशीनों की क्षमता के आधार पर लगाया जाएगा, जिससे उत्पादन की सटीकता नापने की जटिलता समाप्त होती है और कर निर्धारण अधिक पारदर्शी बनता है।

     

    इस उपकर से प्राप्त राजस्व का एक उल्लेखनीय भाग भारत की रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि विभिन्न समयों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों में देश में गोला-बारूद और आवश्यक सैन्य उपकरणों के निम्न भंडार को लेकर गंभीर टिप्पणियाँ सामने आई हैं। आज के जटिल युद्ध परिदृश्य—जहाँ साइबर खतरे, अंतरिक्ष-आधारित निगरानी, रिमोट अटैक सिस्टम, आधुनिक मिसाइल तकनीक और बहु-आयामी सीमाएँ नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही हैं—में भारत को तत्परता बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता है।

     

    रक्षा मंत्रालय के लिए वार्षिक बजट प्रावधानों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना गया, क्योंकि ऐसे प्रावधान आर्थिक चक्रों और वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। इसके विपरीत, उपकर के माध्यम से प्राप्त राजस्व अधिक स्थिर, सुरक्षित और दीर्घकालिक होता है। यह सुनिश्चित करेगा कि रक्षा खरीद, अवसंरचना उन्नयन और रणनीतिक योजना का चक्र बाधित न हो।

     

    सार्वजनिक स्वास्थ्य के संदर्भ में, सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्यों को मिलने वाला उपकर हिस्सा उनके स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत के संघीय ढांचे में स्वास्थ्य मुख्यतः राज्य विषय है, जिस कारण राज्यों पर रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मातृ–शिशु स्वास्थ्य, दवा उपलब्धता, अवसंरचना विकास और आपातकालीन स्वास्थ्य स्थितियों का बड़ा भार होता है। उपकर से प्राप्त राजस्व राज्यों को एक विश्वसनीय संसाधन उपलब्ध कराएगा, जिससे वे पुरानी बीमारियों से लेकर उभरते संक्रमणों तक, विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सकें।

     

    वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि इस उपकर का एक प्रतीकात्मक संदेश भी है—ऐसे उत्पादों पर कर लगाकर, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिमकारी हैं, सरकार जनहित में अनुचित उपभोग प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करती है और उन क्षेत्रों का वित्तपोषण करती है जिन्हें अत्यधिक निवेश की आवश्यकता है। यह एक व्यापक नीति दृष्टिकोण को रेखांकित करता है जिसमें हानिकारक उत्पादों से प्राप्त कर को सार्वजनिक कल्याण में निवेश करना नैतिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर उचित माना जाता है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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