देशभर के उपभोक्ताओं के लिए नए साल की शुरुआत राहत भरी होने जा रही है, क्योंकि 1 जनवरी से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमतों में प्रति यूनिट 2 से 3 रुपये तक की कमी आने की उम्मीद है। यह बदलाव पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड द्वारा लागू की जा रही एक नई और युक्तिसंगत टैरिफ व्यवस्था के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
इस फैसले को प्राकृतिक गैस क्षेत्र में एक अहम नीतिगत सुधार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार और नियामक संस्थाओं का मानना है कि सीएनजी और पीएनजी जैसी स्वच्छ ईंधन प्रणालियों को किफायती बनाकर न केवल आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम किया जा सकता है, बल्कि देश में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को भी बढ़ाया जा सकता है। नई टैरिफ संरचना से परिवहन क्षेत्र में सीएनजी का उपयोग करने वाले वाहन मालिकों और रसोई में पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों परिवारों को सीधा फायदा मिलने की संभावना है।
पीएनजीआरबी के अनुसार, यह निर्णय 2023 से लागू मौजूदा दूरी आधारित टैरिफ ढांचे की व्यापक समीक्षा के बाद लिया गया है। पुराने ढांचे में जटिलता और क्षेत्रीय असमानता देखी जा रही थी, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में गैस की कीमतों में बड़ा अंतर था। नई एकीकृत व्यवस्था के जरिए इस असमानता को कम करने और कीमतों को अधिक पारदर्शी तथा स्थिर बनाने का प्रयास किया गया है।
नई एकीकृत टैरिफ व्यवस्था और उपभोक्ताओं को होने वाली बचत
इस सुधार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तीन-जोन वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दो-जोन की सरल टैरिफ प्रणाली लागू करना है। पहले प्राकृतिक गैस के परिवहन शुल्क को पाइपलाइन की दूरी के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा गया था। 200 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 42 रुपये प्रति यूनिट, 300 से 1200 किलोमीटर के बीच 80 रुपये प्रति यूनिट और 1200 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए 107 रुपये प्रति यूनिट शुल्क तय था। यह व्यवस्था तकनीकी रूप से तो उपयुक्त मानी जाती थी, लेकिन इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले उपभोक्ताओं पर अधिक बोझ पड़ता था।

