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रेशम उत्पादन से आत्मनिर्भर बनीं ग्राम दशौली की चम्पा देवी

 

अल्मोड़ा, 4 जनवरी 2026

 

रेशम उत्पादन से आत्मनिर्भर बनीं ग्राम दशौली की चम्पा देवी।

सरकारी योजनाओं के सहयोग से बढ़ी आय, महिला सशक्तिकरण की बनी मिसाल।

जनपद अल्मोड़ा के विकासखंड भिकियासैंण अंतर्गत ग्राम दशौली निवासी चम्पा देवी, पत्नी मदन सिंह ने रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है। उनकी यह सफलता राज्य सरकार की योजनाओं और रेशम विभाग के तकनीकी सहयोग का परिणाम है।

सहायक निदेशक रेशम संजय कला ने बताया कि वर्ष 2019–20 में चम्पा देवी द्वारा 300 शहतूत वृक्षों का रोपण किया गया, जिनमें से प्रथम वर्ष में 300 शहतूत पौधे विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए तथा द्वितीय वर्ष में 150 अतिरिक्त पौधे प्रदान किए गए। शहतूत पौधों का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, जैविक खाद का प्रयोग तथा समय-समय पर छंटाई-प्रूनिंग कर उन्होंने पौधों को उच्च गुणवत्ता का बनाया।

मनरेगा के अंतर्गत उन्हें ₹14,000 की मजदूरी प्राप्त हुई। इसके पश्चात वर्ष 2020–21 में शहतूत पौधों की गुणवत्ता के आधार पर उनका चयन मनरेगा योजना एवं सीडीपी-मनरेगा योजना के तहत किया गया, जिसके अंतर्गत रेशम कीटपालन भवन निर्माण हेतु ₹90,000 की अनुदान राशि प्रदान की गई।

वर्ष 2022–23 में कीटपालन भवन निर्माण के उपरांत रेशम विभाग द्वारा उन्हें कीटपालन से संबंधित आवश्यक उपकरण जैसे ट्रे, माउंटेज, रैक, चॉपिंग नाइफ आदि उपलब्ध कराए गए। शहतूत की बेहतर उपलब्धता के कारण उन्हें रेशम कीट ट्रे नियमित रूप से प्राप्त होती हैं, जिससे वर्ष में दो बार कीटपालन कर वे ₹15,000 से ₹18,000 तक का रेशम कोया उत्पादन कर रही हैं। उत्पादित रेशम कोया विभाग के माध्यम से विक्रय कर उन्हें तत्काल भुगतान भी प्राप्त होता है।

विगत वर्षों में उनके रेशम कोया उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है। साथ ही, ग्राम दशौली की 26 अन्य महिलाएं भी इस कार्य से जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। कीटपालन के अतिरिक्त, शहतूत की पत्तियों का उपयोग चारे के रूप में किया जा रहा है, जिससे पशुओं में प्रोटीन की मात्रा बढ़ी है और दूध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।

चम्पा देवी का कहना है कि रेशम उत्पादन से उन्हें न केवल आर्थिक संबल मिला है, बल्कि वे अपने परिवार की आय बढ़ाकर सम्मानजनक जीवन यापन कर पा रही हैं। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार तथा रेशम विभाग का आभार व्यक्त करते हुए अन्य महिलाओं से भी इस गतिविधि को अपनाने का आह्वान किया है।

 चंपा देवी की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

By D S Sijwali

Work on Mass Media since 2002 ........

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