• Sat. Mar 28th, 2026

    जियो लाइन टैंकों की गुणवत्ता जांच में चयनात्मक रवैया?

    जियो लाइन टैंकों की गुणवत्ता जांच में चयनात्मक रवैया?

     

    कृषि मंत्री कार्यालय के निर्देशों की अनदेखी, केवल एक फर्म की जांच — दो को बिना परीक्षण ‘क्लीन चिट

     

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के अंतर्गत प्रदेश में निर्मित जियो लाइन टैंकों (Geo Line Tank) की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    यह मामला कृषि मंत्री कार्यालय के आदेश पत्रांक 3287, दिनांक 21 नवम्बर 2025 से जुड़ा है, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रदेश के सभी जिलों में निर्मित जियो लाइन टैंकों की गुणवत्ता की जांच कर दोषी फर्मों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

     

    यह निर्देश उस समय जारी हुआ जब कृषि मंत्री के निरीक्षण के दौरान जनपद चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी में बनाए गए जियो लाइन टैंकों की गुणवत्ता पर सवाल उठे। मंत्री कार्यालय को अवगत कराया गया था कि कई फर्मों द्वारा निर्मित टैंक निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

     

    इसके बावजूद, कृषि निदेशालय द्वारा 24 नवम्बर 2025 को जारी पत्र में बताया गया कि उस समय प्रदेश में तीन अधिकृत फर्में कार्यरत थीं—

     

    Saaransh Agro Solution, देहरादून

     

    Shalimar Enviro Pvt. Ltd., दिल्ली

     

    Varun Fertilizers Pvt. Ltd., देहरादून

    RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि केवल Varun Fertilizers Pvt. Ltd. द्वारा निर्मित टैंकों की ही गुणवत्ता जांच कराई गई, जबकि शेष दो फर्मों को बिना किसी भौतिक जांच के ही संतोषजनक मान लिया गया।

     

    यह स्थिति कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है—

    ▪ जब मंत्री कार्यालय के निर्देश “समस्त फर्मों एवं समस्त जिलों” में जांच के थे, तो जांच को सीमित क्यों किया गया?

    ▪ दो फर्मों को गुणवत्ता परीक्षण से बाहर क्यों रखा गया?

    ▪ क्या जांच प्रक्रिया में चयनात्मकता अपनाई गई?

     

    यह पूरा मामला पूर्व कृषि अधिकारी, RTI एक्टिविस्ट एवं समाजसेवी श्री चन्द्र शेखर जोशी (भीमताल) द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर सामने आया है।

     

    RTI दस्तावेज यह भी स्पष्ट करते हैं कि मंत्री कार्यालय ने निर्देश दिए थे कि यदि गुणवत्ता असंतोषजनक पाई जाए तो संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर उनका पंजीकरण निरस्त किया जाए।

    लेकिन कृषि निदेशालय द्वारा की गई आंशिक जांच से यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं कुछ फर्मों को बचाने का प्रयास तो नहीं किया गया?अब यह सवाल सार्वजनिक हित में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है—

    ► क्या कृषि मंत्री कार्यालय को पूरी और सही रिपोर्ट भेजी गई?

    ► क्या जांच प्रक्रिया निष्पक्ष थी?

    ► क्या इस मामले में वित्तीय अनियमितता की आशंका है?

    ► और क्या इस प्रकरण की स्वतंत्र व व्यापक जांच आवश्यक नहीं है?

     

    प्रदेश के किसानों से जुड़ी इस महत्वाकांक्षी योजना में यदि गुणवत्ता से समझौता हुआ है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जनहित के साथ गंभीर खिलवाड़ है।’

    By D S Sijwali

    Work on Mass Media since 2002 ........

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *