मेहनत ये शब्द सुनने में सरल लगता है परन्तु असल में यह इतना आसान नहीं है। बिना मेहनत के कुछ भी नहीं होता, रोटी कमाने में मेहनत लगती है फिर उसे बनाने में मेहनत लगती है यहाँ तक की बनाने के बाद भी उसे खाने में, इसी को मेहनत कहते है।
ऐसे ही अल्मोड़ा के जखेटा गांव के नीरज सिंह बिष्ट भी हैं। अचानक से उनका काम बंद हो गया। आर्थिक संकट सामने आ गया। उन्होंने हार नहीं मानी और मसूरी से करीब 400 किमी दूर अपने गांव के पास स्वरोजगार फिर से शुरू कर लिया। लोग उनकी मेहनत और हौसले की अब तारीफ कर रहे हैं। नीरज गांव के अन्य लोगों को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह इन दिनों अपने काम को लेकर काफी चर्चा में हैं।
मसूरी फूड वैन लाकर बल्टा बैंड के पास स्वरोजगार शुरू किया
नीरज रोजगार के लिए मसूरी गए। यहां पर उसने कई जगहों पर काम किया। फिर उसने मसूरी में अपनी फूड वैन शुरू कर स्वरोजगार किया। करीब 6 माह पहले जब मसूरी में अतिक्रमण हटाया गया तो उनकी फूड वैन को भी हटा दिया गया। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संंकट आ गया। इसके बाद नीरज ने अपने घर अल्मोड़ा आने का फैसला किया। यहां पर उसने मसूरी फूड वैन लाकर बल्टा बैंड के पास स्वरोजगार शुरू किया। पहले कुछ दिन काम कम चला। लेकिन अब थोडा ठीक है। नीरज ने इंटर तक की पढ़ाई अल्मोड़ा के रैमजे इंटर कॉलेज से की है। नीरज बताते हैं घर के पास काम करना काफी अच्छा है। भले ही यहां पर आय कम हो। लेकिन पैसे की बचत होती है। कहा महानगरों में खर्चे बहुत ज्यादा हैं। नीरज ने बताया कि गांव के अन्य युवाओं को भी वह स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बताया कि फूड वैन में वह हर तरह के व्यंजन बना रहे हैं। इन दिन वह अपने मेहनत के लिए काफी चर्चा में है।
