अल्मोड़ा: देवभूमि के अल्मोड़ा जिले में शराब की दुकानों के खिलाफ चल रहे लंबे संघर्ष और सड़कों पर उतरी जनशक्ति की आखिरकार जीत हुई है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नई मदिरा दुकानों को लेकर उठे भारी विरोध और जनांदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीन शराब दुकानों को आगामी वित्तीय वर्ष से बंद करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
इन क्षेत्रों में नहीं खुलेंगी दुकानें
प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, उन क्षेत्रों को लक्षित किया गया है जहाँ विरोध प्रदर्शन सबसे उग्र और संगठित था:
* सोमेश्वर क्षेत्र: दौलाघट स्थित विदेशी मदिरा की दुकान।
* द्वाराहाट क्षेत्र: तिपोला और खेड़ा की विदेशी शराब दुकानें।
* रानीखेत क्षेत्र: पातली स्थित देशी शराब की दुकान।
महिलाओं की ‘हुंकार’ ने बदला फैसला
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे सशक्त भूमिका ग्रामीण महिलाओं और सामाजिक संगठनों की रही। महिलाओं ने शराब के कारण सामाजिक ताने-बाने और युवाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को मुख्य मुद्दा बनाया था। लगातार धरने, प्रदर्शन और जिला मुख्यालय तक अपनी आवाज पहुँचाने के बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल राजस्व या कानून लागू करना नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और लोकहित को प्राथमिकता देना भी है।
प्रशासनिक निर्देश और भविष्य की रणनीति
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने आबकारी और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस निर्णय को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। सभी जरूरी औपचारिकताओं को जल्द पूरा करने को कहा गया है ताकि आगामी सत्र से ये दुकानें संचालित न हो सकें। यह फैसला उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह साबित करता है कि यदि जनभावनाएं संगठित और तर्कसंगत हों, तो शासन-प्रशासन को भी जनहित में झुकना पड़ता है।

