अभिनव कुमार बने उत्तराखंड के 12वें डीजीपी, बताई प्राथमिकताएं

अभिनव कुमार ने गुरुवार को उत्तराखण्ड पुलिस के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

आज दिनांक 30 नवम्बर, 2023 को अभिनव कुमार द्वारा पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड का पदभार ग्रहण किया गया। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिनव कुमार ने 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार से पदभार संभाला, जो गुरुवार को सेवानिवृत्त हुए । कुमार हिमालयी राज्य के 12वें डीजीपी है। विभाग ने संघ लोक सेवा आयोग को प्रमुख पद के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों – पीवीके प्रसाद, दीपम सेठ (दोनों 1995 बैच) और कुमार के नाम प्रस्तावित किए थे।

पदभार ग्रहण करने के उपरांत मीडिया को ब्रीफ करते हुए उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बतायी।

उन्होंने बताया

•हमारा उत्तराखंड पुलिस का ध्येय है मित्रता, सेवा, सुरक्षा। मित्रता केवल सभ्य नागरिकों के लिए है। अपराधियों के लिए हम हमेशा काल बनके रहेंगे।

•उत्तराखंड शांत प्रदेश है।सुदृढ़ कानून व्यवस्था प्रदेश की पहचान है, इसलिए कानून व्यवस्था के मोर्चे पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।

• ट्रेडिशनल पुलिसिंग के सिद्धांतों एवं सिखलाई को बरकरार रखते हुए नई चुनौतियों से डटकर सामना करेंगे।•माननीय मुख्यमंत्री जी के नशामुक्त उत्तराखण्ड मिशन के तहत ड्रग्स के विरूद्ध कार्यवाही को और अधिक प्रभावी करना हमारी प्राथमिकता होगी।

•प्रदेश के प्राकृतिक रूप व आपदा की दृष्टि से संवदेनशील होने के दृष्टिगत हम अपनी First Responder की क्षमता को और अधिक बेहतर बनाएंगे।

•स्थानीय जनता के साथ ही उत्तराखण्ड आने वाले पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के साथ मित्रवत व्यवहार करके उनके लिए सुगम व्यवस्था बनाने पर जोर दिया जाएगा।


•बढ़ते साइबर क्राइम पर रोकथाम लगाएंगे। महिला संबंधी अपराधों के सम्बन्ध में संवेदनशीलता बढ़ायी जाएगी। इसके लिए हर स्तर के अधिकारी/कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
•पुलिसकर्मियों के कल्याण पर भी जोर रहेगा। उनके हाउसिंग, स्वास्थ्य, बच्चों की अच्छे शिक्षा सभी मेरी प्राथमिकताएं रहेंगी।

बुधवार को अपर मुख्य सचिव (गृह) राधा रतूड़ी ने नियुक्ति की पुष्टि की। अभिनव कुमार वर्तमान में एडीजी इंटेलिजेंस हैं और उन्हें डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अशोक कांत शरण उत्तराखंड के पहले डीजीपी थे। उनके बाद प्रेम दत्त रतूड़ी, कंचन चौधरी भट्टाचार्य, सुभाष जोशी, ज्योति स्वरूप पांडे, विजय राघव पंत, सत्यव्रत बंसल, बीएस सिद्धू, एमए गणपति, अनिल रतूड़ी और अशोक कुमार थे। इससे पहले, शीर्ष पद पाने के लिए न्यूनतम 30 वर्ष का सेवा अनुभव अनिवार्य था।

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