Anganwadi protocol ….दिव्यांग बच्चों के लिए जमीनी स्तर पर डेटा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से मिल जाएगा।’
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मंगलवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल लॉन्च किया जो उन्हें 0-6 वर्ष आयु वर्ग के विकलांग बच्चों को ट्रैक करने और उनकी मदद करने में मदद करेगा।नए प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा जो उन्हें इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने में मदद करेगा।केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रोटोकॉल के लॉन्च के बाद कहा, “अगर हम इसे सामुदायिक नजरिए से देखें तो यह हमारे समुदाय में एक मूक क्रांति है।”
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि पहली बार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दिव्यांगता की पहचान के लिए बच्चों की जांच में मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम (anganwadi protocol) से प्रतिवर्ष कम से कम एक लाख बच्चों को लाभ मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल Anganwadi protocol पर कहा, “…आज देश भर के 13 लाख 90 हज़ार आंगनवाड़ियों में एक प्रोटोकॉल समर्पित किया गया। दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बच्चों की स्क्रीनिंग हर आंगनवाड़ी में कैसे होगी, बच्चा अगर दिव्यांग है तो उसके लिए यूनिक ID बनाने, उनकी पढ़ाई की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने को लेकर पूरा प्रोटोकॉल आज राष्ट्र को समर्पित किया गया है।”
मंत्री ने कहा कि विकलांग बच्चों पर जमीनी स्तर का डेटा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उपलब्ध हो जाएगा, और बच्चों को पोषण ट्रैकर के माध्यम से आगे ट्रैक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार होगा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जागरूकता फैलाएंगी कि विकलांगता समाज के लिए एक चुनौती नहीं है बल्कि समाज के लिए एक बच्चे की मदद करने का एक अवसर है। सुश्री ईरानी ने कहा, “मानसिकता को बदलने की जरूरत है।”
ईरानी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विकलांग छात्रों को मुख्यधारा के स्कूलों में एकीकरण को प्राथमिकता देने पर जोर देती है। “हम जानते हैं कि बच्चे का 85% मानसिक विकास छह साल की उम्र तक हो जाता है। आज, हमारी शिक्षा प्रणाली में दिव्यांग बच्चों के लिए नए प्रावधान हैं । ”
