राज्य में आपदा से हुई भारी तबाही एवं अतिक्रमण के नाम पर गरीबों को उजाड़े जाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) अल्मोड़ा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद जोशी ने राज्यपाल गुरमीत सिंह को ज्ञापन भेजा।
उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि उत्तराखंड में मानसून की बारिश से लगभग पूरा ही राज्य प्रभावित हुआ है, किन्तु उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र इस बरसात में सर्वाधिक प्रभावित हुआ है।
सभी जिलों में आपदा के चलते भारी नुकसान हुआ है। बहुत से लोगों की जान गई और कृषि भूमि, पशुधन का भी नुकसान हुआ है।
,इस आपदा में जिस तरह से चारधाम सड़क, रेलवे की परियोजना भूस्खलन से प्रभावित हुई है, उसने विकास के विनाशकारी, अवैज्ञानिक ठेकेदारी, मुनाफाखोर और प्रकृति व पर्यावरण विरोधी माडल को उजागर किया है, जिसके प्रति पर्यावरणविद, वैज्ञानिक एवम राज्य की सजग आंदोलनकारी शक्तियां लगातार चेतावनियां देती रही है. इस आपदा से भविष्य के सबक लिए जाने चाहिए ।
उत्तराखंड पूर्व से ही आपदा संवेदी राज्य रहा है। यहां लगातार आपदा के चलते लोगों का भरी नुकसान हुआ है. 2013 की आपदा के दी। अभी जोशीमठ की आपदा जारी है. ऐसा ही संकट राज्य के अन्य नगरों में आने की चेतावनी लगातार मिल रही है मौसम के बदलाव और विकास के अवैज्ञानिक प्रयोग इस तरह की आपदाओं में वृद्धि ही करेंगे. इन सबके मद्देनजर आज 5 सितंबर 2023 को राज्य की तीन प्रमुख वामपंथी पार्टियां भाकपा, माकपा, भाकपा(माले)- पूरे राज्य में एक
दिवसीय संयुक्त धरने के माध्यम से आपसे मांग करते हैं कि
- संपूर्ण राज्य के सभी आपदा प्रभावित लोगों का सही जमीनी आकलन कर तत्काल राहत एवं पुनर्वास किया जाये।
- आपदा से प्रभावित गांवों के विस्थापन पुनर्वास की कार्यवाही शीघ्र अमल में लाई जाए
- आपदा से लगातार प्रभावित इस राज्य की विस्थापन एवम पुनर्वास नीति में बदलाव करते हुए उसे और व्यापक व व्यवहारिक बनाया जाए.
- आपदा प्रभावितों को मिलने वाली अहेतुक राशि एवम मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए
- राज्य में विकास के माडल को वैज्ञानिक व पर्यावरण के मानकों को ध्यान में रखकर खड़ा किया जाए।
उन्होंने राज्यपाल को लिखा कि इसके अतिरिक्त डेंगू भी राज्य में महामारी और आपदा का रूप ले चुका है। देहरादून, हल्द्वानी जैसे मैदानी इलाकों में ही नहीं श्रीनगर (गढ़वाल) जैसे पहाड़ी नगर भी डेंगू की मार से त्रस्त हैं। बीते कुछ सालों से यह हर साल की परिघटना बन गया है, लेकिन डेंगू क रोकथाम के कोई ठोस उपाय राज्य सरकार की ओर से नहीं किए जा रहे हैं. डेंगू की रोकथाम और उन्मूलन के लिए ठोस कदम उठाए जा चाहिए।
जिस समय राज्य के आम लोग भारी आपदा से त्रस्त हैं, उसी समय अतिक्रमण हटाने की नाम पर उनके दुकान-मकानों पर बुलडोज चलाया जा रहा है. ऐसे कस्बे बसासतें व्यापरिक केंद्र भी तोड़े जा रहे हैं, जो सड़क बनने से पहले से अस्तित्व में हैं, यह भी गौरतलब है कि सारी मार छोटे-मझोले व्यवसाय करने वालों पर है. हम यह मांग करते हैं कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों को उजाड़ने का यह खेल बंद होना चाहिए।

