खुद की बेकरी से आत्मनिर्भर बनी गीता देवी, बनी रीप परियोजना की सफल लाभार्थी
जिलाधिकारी विनीत तोमर के नेतृत्व एवं मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोण्डे के निर्देशन में ग्रामीण महिलाएं बढ़ रही हैं सशक्तिकरण की ओर:
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में, ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सशक्त और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए जाने की दिशा में विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इनमें से एक है रीप (ग्रामीण उद्यम वेज वृद्धि परियोजना) परियोजना, जिसके तहत महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता प्रदान की जा रही है। गीता देवी, ग्राम गहणा, विकासखंड सल्ट की निवासी, रीप परियोजना की सफल लाभार्थी हैं। पूर्व में वे एक कर्मचारी के रूप में कार्य करती थीं, जहाँ उन्हें मात्र ₹5,000 का वेतन प्राप्त होता था। परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। रीप परियोजना के तहत, उन्हें ₹3,00,000 की कार्ययोजना तैयार करने में सहायता प्रदान की गई, जिसमें परियोजना द्वारा 30% (₹75,000) अनुदान दिया गया। उन्होंने शेष राशि (₹2,25,000) बैंक ऋण और स्वयं के योगदान से प्राप्त की। रीप परियोजना से प्राप्त सहयोग के बाद, गीता देवी ने अपनी बेकरी का शुभारंभ किया। पूर्व अनुभव और रीप परियोजना से प्राप्त सहायता के फलस्वरूप उनका व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहा है। वर्तमान में, उनकी मासिक आय ₹7,000-₹8,000 है, और अनुमान है कि यह वार्षिक आधार पर ₹2 लाख तक पहुंच जाएगी। गीता देवी न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि उन्होंने एक कर्मचारी को भी रोजगार प्रदान किया है। उनकी सफलता ने समूह की अन्य सदस्यों को भी प्रेरित किया है, जो अब अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए उत्सुक हैं। मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोण्डे ने कहा कि ” गीता देवी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। रीप परियोजना के माध्यम से हम अधिक से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
