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अल्मोड़ा: रानीधारा में आतंक का पर्याय बने गुलदार को आखिरकारपिंजरे में कैद

अल्मोड़ा। रानीधारा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आतंक का पर्याय बने गुलदार को आखिरकार वन विभाग ने आज सुबह लगभग 5:30 बजे पिंजरे में कैद कर लिया। यह  गुलदार के पकड़े जाने के बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है और पार्षद सहित वन विभाग का आभार व्यक्त किया है।

 

स्थानीय लोगों के अनुसार, रानीधारा और आसपास के इलाकों में गुलदार की लगातार आवाजाही से दहशत का माहौल बना हुआ था। सुबह-सुबह और शाम के समय लोग घरों से निकलने में भय महसूस कर रहे थे। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष चिंता का सामना करना पड़ रहा था। कई बार गुलदार के घरों के पास दिखने और पालतू पशुओं पर हमले की आशंका ने लोगों की नींद उड़ा दी थी।

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पार्षद आशा बिष्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और वन विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क साधा। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाए जाने की मांग की। पार्षद के प्रयासों के बाद वन विभाग ने रानीधारा में रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया और निगरानी बढ़ाई।

 

आज तड़के करीब 5:30 बजे गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों के साथ गुलदार को कब्जे में लिया। इसके बाद क्षेत्र में फैली दहशत का माहौल काफी हद तक शांत हो गया।

 

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से वे रात में ठीक से सो नहीं पा रहे थे और सुबह के समय अकेले बाहर निकलने से डर रहे थे। गुलदार के पकड़े जाने से अब लोगों को काफी राहत मिली है। क्षेत्रवासियों ने पार्षद आशा बिष्ट की सक्रियता और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि का यही दायित्व होता है कि वह जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाए।

 

वहीं पार्षद आशा बिष्ट ने कहा कि जनता की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने वन विभाग का भी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सतर्क रहें और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।

 

गुलदार के पकड़े जाने के बाद रानीधारा क्षेत्र में सामान्य स्थिति लौटती नजर आ रही है और लोग अब स्वयं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

By swati tewari

working in digital media since 5 year

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