सुरमई शाम उस्ताद आफाक हुसैन के नाम
विश्व के ख्यातिलब्ध घराने के उस्तादो ने बिखेरा हस्तलाघव का जादू
आस्था गोस्वामी की मखमली आवाज ने मोहा
अल्मोड़ा। शारदा पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा के प्रेक्षागृह में लखनऊ के तबला घराने के खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खान साहब की स्मृति में शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात अल्मोड़ा नगर के वरिष्ठ संगीत विद्वान श्री गिरीश चंद्र जोशी, श्री दिनेश चंद्र पांडे (वैद्य) ,श्री अमरनाथ भट्ट और श्री नवीन बिष्ट जी को अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शारदा पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा स्वागत गीत और भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया, जिसका संगीत निर्देशन श्री जीवन चंद आर्य, तबला संगत श्रीमती ऋतु जोशी और प्रमोद कुमार का था। फिर गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत से लखनऊ घराने के तबला वादक श्री पंकज कुमार चौधरी के शिष्य, श्री राजेंद्र सिंह नयाल और सुनील कुमार के शिष्यों द्वारा तबला वादन प्रस्तुत किया गया जिन शिष्यों ने तबला वादन प्रस्तुत किया उनके नाम है।

जितेंद्र कुमार श्री रुपेश कुमार श्री राजकुमार और श्री गोकुल मंडोला इस कार्यक्रम में हारमोनियम पर लहरा दिया श्रीमती नेहा मुनगली ने। तत्पश्चात वृंदावन से पधारी विदुषी आस्था गोस्वामी का गायन आरंभ हुआ उन्होंने राग मियांमल्हार से अपने कार्यक्रम का आरंभ किया तत्पश्चात राग हंसध्वनि और अंत में उन्होंने एक झूला प्रस्तुत किया। तबला संगत श्री पंकज कुमार चौधरी और हारमोनियम संगत श्री दिनकर द्विवेदी ने किया। इस कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति दिल्ली से पधारे अजराड़ा घराने के उस्ताद अकरम खान और उनके सुपुत्र श्री जरगाम खान के युगल तबला वादन की रही। उन्होंने तीनताल प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने अजराड़ा का पेशकार, कायदा, रेला, गत और कुछ लखनऊ घराने खलीफा उस्ताद आफाक हुसैन खान की रचनाएं जैसे रेला, कायदा,गत एवं चक्रदार टुकड़ा इत्यादि। इस कार्यक्रम का संचालन श्रीमती गीता जोशी और आदित्य ने किया। इस कार्यक्रम के आयोजक श्री पंकज कुमार चौधरी, श्रीमती रश्मि चौधरी एवं उनके मित्र श्री अशोक कुमार पांडे, श्री राघव पंत, श्री राजेंद्र सिंह नयाल , श्री सुनील कुमार और विशेष रूप से शारदा पब्लिक स्कूल के संस्थापक श्री शेखर लखचौरा और प्रधानाचार्य श्रीमती विनीता लखचौरा थे।
