रामकृष्ण कुटीर के स्थापना के 108 वर्ष पर कार्यक्रम आयोजित

रामकृष्ण कुटीर के स्थापना के 108 वर्ष पर कार्यक्रम आयोजित

हुआ

 

रामकृष्ण कुटीर,अल्मोड़ा में कुटीर के 108 वर्षों के सफर और स्वामी दिव्यांनद जी महाराज के आगमन पर गोष्ठी आयोजित हुई और तीन भवनों का उद्घाटन हुआ।

 इस अवसर पर स्वामी दिव्यानंदजी महाराज (उपाध्यक्ष, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन, बेलूर) और विशिष्ट अतिथियों में प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट (कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय),स्वामी सर्वलोकानंद (सचिव, रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली), श्री अजय वर्मा (महापौर,नगरनिगम, अल्मोड़ा), कुटीर के अध्यक्ष स्वामी ध्रुवेशानंद महाराज, अर्पण महाराज, डॉ चंद्र प्रकाश फुलोरिया आदि अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया।

कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों द्वारा तुरियानंद दिव्यस्मृति’ संग्रहालय, विवेकानंद भवन’, ‘शिवानंद कुटीर’ का उद्घाटन हुआ। इसके बाद शिवानंद हॉल में समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ शांति मंत्र, सरस्वती वंदना से हुआ। 

संचालन करते हुए स्वामी विवेकानंद-महात्मा गांधी आध्यात्मिक पर्यटन परिपथ अध्ययन केंद्र के संयोजक डॉ चंद्र प्रकाश फुलोरिया ने कार्यक्रम की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द जी की इस भूमि में कुटीर की ओर से स्वागत किया। 

इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल ले.जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का रामकृष्ण कुटीर की स्थापना से लेकर अब तक की उपलब्धियों और कार्यों को लेकर एक वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। उन्होंने कुटीर के प्रयासों की सराहना की। 

 कुटीर के अध्यक्ष स्वामी ध्रुवेशानंद ने अतिथियों का स्वागत किया और कुटीर की गतिविधियों से अवगत कराया। साथ ही कुटीर में तैयार किये भवनों निर्माण आदि में अपना सहयोग देने वाले महानुभावों की जानकारी दी। 

 श्री अजय वर्मा (महापौर,नगरनिगम अल्मोड़ा) ने कहा कि अल्मोड़ा एक आध्यात्मिक भूमि और स्वामी विवेकानन्द जी की कर्मस्थली रही है। युवा अपने पथ से भटक रहे हैं, ऐसे में विवेकानंद के आदर्शों की समाज को आवश्यकता है। 

 प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट (कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय) ने कहा कि भारत 2047 में विकसित हो जाएगा। इसे विकसित बनाने के लिए आप सभी युवाओं और विद्यार्थी को शारीरिक और बौद्धिक विकास करने के लिए प्रयास करने होंगे। स्वामी विवेकानन्द जी का अध्ययन करें। उन्होंने विद्यार्थियों को बौद्धिकता बढ़ाने के लिए प्रण लेने की बात कही।  

स्वामी सर्वलोकानंद (सचिव, रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली) ने कहा की भारत विश्वगुरु बनेगा। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए युवा महत्वपूर्ण हैं। युवाओं को उन्होंने हमेशा जगाया। हमारे भीतर चारित्रिक बल होना चाहिए, तभी हम विकसित भारत बना सकते हैं। बिना चरित्र के देश को विकसित नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि चरित्र ही बलवान बनाता है। स्वामी जी ने इन सभी बातों को कहा है। आप सभी उनके व्यक्तित्व से सीख लें, अध्ययन करें। देश की सेवा करो देश से प्यार करो। यह अल्मोड़ा पावन धरती है 

 स्वामी दिव्यानंदजी महाराज (उपाध्यक्ष, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन, बेलूर) ने कहा कि आप रामकृष्ण कुटीर, अल्मोड़ा और लोहाघाट के मायावती आश्रम की आध्यात्मिक और दिव्यभूमि से परिचित हैं। ये भूमि आध्यत्मिक केंद्र हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि आप सभी स्वामी विवेकानन्द जी के व्यक्तित्व को पढ़ें। उपनिषद, कठोपनिषद आदि का अध्ययन करें। ये आपको आत्मबल देगी। आप ईश्वर और स्वयं पर विश्वास रखें। आपके भविष्य के निर्माण के लिए अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने देशहित को सर्वोपरि मानते हुए युवाओं को प्रेरित किया।

इस अवसर पर छात्रों में विकास सिंह ने भी बात रखी। 

इस अवसर पर चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिनमें रामकृष्ण कुटीर: ग्लिम्प्सेस फ्रॉम थे पास्ट, रामकृष्ण कुटीर, अल्मोड़ा का इतिहास, द इटरनल क्वेस्ट: द लाइफ स्केच ऑफ स्वामी तुरियानंद , तुरियानंद दिव्यस्मृति थी। 

रामकृष्ण कुटीर ,अल्मोड़ा के सहयोग से सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में संचालित स्वामी विवेकानंद-महात्मा गांधी आध्यात्मिक पर्यटन परिपथ,अध्ययन केंद्र की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। 

कार्यक्रम में कुटीर को भव्यता प्रदान करने और सहयोग देने वाले सहयोगियों का अभिनंदन करते हुए सम्मानित किया गया। जिनमें श्री विनोद कुमार, सीआईपीएल, नोएडा (लाइब्रेरी बिल्डिंग में लिफ्ट लगाने ), श्री नीलाभ सिन्हा और INTACH, नई दिल्ली की टीम (तुरीयानंद दिव्यस्मृति संग्रहालय निर्माण),आरवीएनएल, ऋषिकेश और आरवीएनएल, नई दिल्ली (विवेकानंद भवन निर्माण में सहयोग) का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी, नीता दास, आर्किटेक्ट, एनएसडी एसोसिएट्स, कोलकाता (शिवानंद कुटीर में सहयोग), हर्षवर्णा मेहता, भक्त, यूएसए (शिवानंद कुटीर में सहयोग), अनिंद्य रॉय, भक्त, कोलकाता (तुरीयानंद दिव्यस्मृति संग्रहालय निर्माण में सहयोग), मनोज मेहरा, स्ट्रक्चरल इंजीनियर, बागेश्वर (विवेकानंद भवन निर्माण में सहयोग), सुमंतो रॉय, निर्माण, कोलकाता (शिवानंद कुटीर), मिहिर के दास, भक्त, बेंगलुरु (रामकृष्ण कुटीर: अतीत की किताब की झलक) के लिए सम्मानित किया गया। 

कार्यक्रम में संचालन डॉ. सी.पी. फुलोरिया और अर्पण महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 

इस अवसर पर स्वामी अर्पण महाराज, गोविंद महाराज, स्वामी मायाधीशानंद, राजू महाराज, स्वामी विवेकानंद-महात्मा गांधी आध्यात्मिक पर्यटन परिपथ अध्ययन केंद्र के सह संयोजक डॉ ललित जोशी, डॉ अनामिका पंत, अनूप बिष्ट के साथ संत, सन्यासी और सहयोगी, स्वामी विवेकानन्द जी के भक्तगण, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शारदा मठ की माताएं उपस्थित रहे।

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