बुद्ध पूर्णिमा 2024: तिथि, समय, इतिहास और महत्व
बुद्ध पूर्णिमा: तिथि और समयवैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार के रूप में महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी। हिंदू पंचांग के अनुसार, 2024 में पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 22 मई को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर होगी और यह तिथि 23 मई को संध्याकाल 6 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगी।
सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा 23 मई को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होगा। हालांकि, व्रत के लिए पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का होना आवश्यक होता है, इसलिए व्रत 22 मई को ही रखा जाएगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय के अनुसार, व्रत के लिए पूर्णिमा तिथि का पूरे दिन होना अनिवार्य है, इसीलिए यह 22 मई को रखा जाएगा।
बुद्ध पूर्णिमा के दिन सुबह किसी पवित्र नदी या गंगा में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए और फिर काला तिल बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। यह माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रदेव को अर्घ्य देने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। इसके अलावा, इस दिन गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को याद करते हुए अहिंसा, करुणा और शांति का पालन करना चाहिए।
गौतम बुद्ध, जिन्हें सिद्धार्थ गौतम के नाम से भी जाना जाता है, एक महान आध्यात्मिक शिक्षक और बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। उनका जन्म 6वीं सदी ईसा पूर्व लुम्बिनी में हुआ था, जो वर्तमान में नेपाल में स्थित है। बड़े समृद्ध परिवार में जन्म लेने के बावजूद, सिद्धार्थ ने आध्यात्मिक उन्नति और मानव पीड़ा के अंत की खोज में अपनी विलासिता का त्याग कर दिया। ध्यान और विचार के कई वर्षों के बाद, सिद्धार्थ ने बोधगया, भारत में बोधि वृक्ष के नीचे बोधि प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अपने उपदेश, जिन्हें धर्म कहा जाता है, साझा करना शुरू किया, जो चार आदर्श सत्यों पर आधारित थे—दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निवारण, और दुःख के निवारण का मार्ग। उनके उपदेशों ने बौद्ध धर्म की नींव रखी, जो दया, सावधानी और आंतरिक शांति की खोज पर जोर देता है। गौतम बुद्ध की शिक्षाएँ आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती हैं।
गौतम बुद्ध का जीवन, उनके त्याग की गाथा और निर्वाण पाने की है ये कहानी बच्चों और बड़ों दोनों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे हमारे जीवन को एक दिशा मिलती है। हर एक इंसान के जीवन में त्याग और सद्भावना होने के साथ-साथ एक लक्ष्य होना चाहिए जिसमें वह सिर्फ अपने बारे में न सोचे बल्कि पूरे समाज के बारे में सोच पाए। आज जिस भय के माहौल में हम लोग जी रहे हैं, जहाँ हत्या, लूट और मैं पर ही अधिकांश लोग अपनी सोच को रोक चुके हैं, ऐसे में बहुत जरूरी है मूल्यों और संस्कृति से जुड़े ज्ञान को अर्जित करना। खासतौर से बच्चों के लिए, क्योंकि वे ही हमारे देश और हमारे समाज का भविष्य हैं।
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