प्रदेश के हर जिले में एक साइबर थाना स्थापित किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही पुलिस, सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध देश में सबसे बड़ा उभरता हुआ अपराध है, जिस पर प्राथमिकता के साथ काम करने की जरूरत है।
बता दें कि साइबर पुलिस साइबर अपराध को रोकने के प्रभारी पुलिस विभाग या सरकारी एजेंसियां हैं। भारत का पहला साइबर पुलिस स्टेशन कर्नाटक के बेंगलुरु में खोला गया था।
राज्य में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा लेते हुए कुमार ने कहा कि प्रदेश में इस साल अपराध नियंत्रण और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही में व्यवहारिक तौर पर अच्छा काम हुआ है। उन्होंने अभियानों में कमजोर पड़ रहे जिलों को और अधिक तेजी से काम करने के निर्देश दिए।
पटेल भवन में हुई इस बैठक में डीजीपी अशोक कुमार ने सभी पुलिस कप्तान को प्रोफेशन पुलिसिंग को बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने हर माह एडीजी कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए। कहा कि अच्छा कार्य करने वाले जिलों के कप्तान को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने ऑपरेशन प्रहार के तहत हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, चंपावत और पिथौरागढ़ की कार्रवाई पर प्रशंसा की।
डीजीपी ने दोनों रेंज प्रभारियों को अपनी-अपनी रेंज में एक से तीन साल की लंबित विवेचनाओं की निगरानी करने के निर्देश दिए। कहा कि वर्तमान में साइबर क्राइम बढ़ रहा है। इस पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी पुलिस कप्तान की है। इसकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी आईजी निलेश आनंद भरणे को दी।कहा कि हर जिले में साइबर थाना स्थापित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
अभी तक प्रदेश में दो साइबर थाने संचालित होते हैं। इनमें एक देहरादून और दूसरा ऊधमसिंहनगर में है। डीजीपी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के भीतर राजमार्ग काफी बदल गए हैं। नए राजमार्ग का निर्माण भी हुआ है।सड़क सुरक्षा के मद्देनजर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों व ड्यूटी प्वाइंट को चिह्नित कर लिया जाए।
नशे की हालत में वाहन चलाने वाले, रैश ड्राइविंग और स्टंट करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। ऑनलाइन चालान नहीं किया जा सकता तो लोगों के नकद चालान करें। पर्वतीय इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की कवरेज बढ़ाई जाए।
