केंद्र सरकार लगातार मोटे अनाज के उपयोग और उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इस साल के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिलेट्स यानी मोटे अनाज को श्री अन्न नाम दिया। इसी कड़ी में अब भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा और मानक दूसरे संशोधन विनियम 2023 के अंतर्गत मोटे अनाज के लिये समग्र समूह मानक तय किये हैं। यह मानक इस वर्ष पहली सितंबर से लागू होंगे।
15 किस्म के मोटे अनाज के समूह का समग्र मानक तय
वर्तमान में केवल कुछ मोटे अनाज के निजी मानक जैसे कि ज्वार, बाजरा और रागी का मिश्रण किया जाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 15 किस्म के मोटे अनाज के समूह का समग्र मानक अब तय किया है। इसमें स्वदेशी और वैश्विक बाजार में अच्छी गुणवत्ता के मोटे अनाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आठ गुणवत्ता मानदंड तय किये गये हैं। समूह का मानक कुटटू, कोडो, कुटकी, कोराले और ऐडले पर लागू होगा।
2023 है अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष
मोटे अनाज के प्रति जागरूकता और उत्पादन को बढ़ावा देने तथा इसे खाने के लिये अप्रैल 2018 में मोटे अनाज को न्यूट्री सीरियल का नाम दिया गया था और वर्ष 2018 को मोटे अनाज का राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया था। पीएम मोदी भी चाहते हैं कि भारत श्री अन्न या मोटे अनाज का वैश्विक केंद्र बने और अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 को ‘जन आंदोलन’ का रूप दिया जाए। भारत दुनिया को मोटा अनाज के लाभ बताने-समझाने में अहम भूमिका निभा रहा है। हमारे देश में एशिया का लगभग 80 प्रतिशत और विश्व का 20 प्रतिशत मोटा अनाज पैदा होता है। मोटे अनाज जहां एक ओर हमारे शरीर के लिए अच्छे है वहीं दूसरी ओर ये किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार हैं। इस कारण से मोटे अनाज को लोकप्रिय बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। चाहे फूड फेस्टिवल हो या कॉन्क्लेव सभी में मोटे अनाज से बने उत्पादों से लोगों को आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में सांसदों के लिए लंच का आयोजन हो, G20 की बैठक हो या सरकारी दफ्तरों की कैन्टीन, सभी में मोटे अनाज से तैयार व्यंजनों को प्रमुखता से परोसा जा रहा है।
मोटा अनाज किसे कहते हैं ?
मोटा अनाज छोटे अनाज के सीरियल फूड का समूह है जो कि सूखे और अन्य जटिल मौसम की स्थितियों में अधिक सहनीय होते हैं। इसकी खेती के लिये कम रासायनिक तत्व जैसे कि उर्वरक और कीटनाशक की आवश्यकता होती है। अधिकांश मोटा अनाज भारतीय है। सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान मोटा अनाज या श्री अन्न की खपत को लेकर कई साक्ष्य बताते हैं कि यह भारत में पैदा की जाने वाली पहली फसलों में से एक थी। इसे गरीबों का अनाज भी कहा जाता है। मोटे अनाज सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है। ये शरीर को सिर्फ प्रोटीन और फाइबर ही नहीं देते बल्कि, खाने वाले को शरीर में उत्पन्न हो रहे रोगों का निदान भी करते हैं। मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी,सांवा या सामा, कंगनी, कोदो, कुटकी और कुट्टू शामिल हैं।
दरअसल श्री अन्न या मोटे अनाज में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। इसके साथ ही बीटा-कैरोटीन, नाइयासिन, विटामिन-बी6, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जस्ता आदि से ये अनाज भरपूर होते हैं। इसमें फाइबर यानी रेशा मौजूद होता है जिससे पाचन दुरुस्त होता है। इस तरह इसको खाने वाले को कब्ज की समस्या नहीं होती। इसका सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है। श्री अन्न को डायबिटीज तथा दिल के रोगियों के लिए भी उत्तम माना जाता है। इन्हीं सब कारणों से मोटे अनाज को सुपरफूड भी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM)- 2023 के माध्यम से ‘मिरेकल मिलेट्स’ की भूली हुई महिमा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार भी इसके उपयोग और उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार लोगों की जागरूक कर रही है।

