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    दस महीने से बंद पड़ा है कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र

    दस महीने से बंद पड़ा है कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र

    अल्मोड़ा -भैसियाछाना विकासखंड का कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र दस महीने से बंद पड़ा है।
    दस महीने पूर्व कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र से पशु क्षेत्रीय प्रसार अधिकारी स्थानांतरण हुआ उसके बाद इस क्षेत्र के कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र बंद है।
    प्रताप, सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता ने अल्मोड़ा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भी इस पशु सेवा केन्द्र दस महीने से बंद होने के संबंध में अवगत कराया गया सिर्फ आश्वासन ही दिया गया दस महीने बीत जाने के बाबजूद भी कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र पशु क्षेत्रीय प्रसार अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई।
    नेगी ने बताया कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र बंद होने से कुनखेत, नौगांव,लिगुडता, मंगलता,हटौला, पतलचौरा,रीम,पिपलखेत, चिमचुआ,रौयत,खुडियारी,जमराढ़ी,बुंगा आदि गांवों के पशु पालकों को अपने जानवरों का उपचार व जानवरों की दवा के लिए धौलछीना पशु चिकित्सालय जाना पड़ता है। जो रीठागाड क्षेत्र से पंद्रह किलोमीटर दूर है सड़क के अभाव के कारण दूरदराज के गांवों के लोगों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा।
    कनारीछीना पशु सेवा केन्द्र में जल्द से जल्द पशु क्षेत्रीय प्रसार अधिकारी की नियुक्ति की जाय।
    बता दें कि पशु क्षेत्रीय प्रसार अधिकारी (Pashu Kshetriya Prasar Adhikari), जिसे पशुधन प्रसार अधिकारी भी कहा जाता है, पशुपालन विभाग में एक महत्वपूर्ण पद है। यह अधिकारी किसानों और पशुपालकों को पशुपालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी और सहायता प्रदान करता है।
    मुख्य कार्य:
    पशुधन का प्राथमिक उपचार:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, पशुओं का प्राथमिक उपचार करते हैं, जैसे कि बीमारियों का निदान और उनका इलाज।
    टीकाकरण:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण करते हैं।
    कृत्रिम गर्भाधान:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के माध्यम से पशुओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
    बधियाकरण:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, पशुओं का बधियाकरण (Castration) करते हैं।
    योजनाओं का प्रचार-प्रसार:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, सरकार द्वारा चलाई जा रही पशुपालन से संबंधित योजनाओं के बारे में किसानों और पशुपालकों को जानकारी देते हैं और उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने में मदद करते हैं।
    योग्यता:
    पशुधन प्रसार अधिकारी बनने के लिए, उम्मीदवारों को आमतौर पर निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए:
    मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान, कृषि या पशुपालन में स्नातक।
    कुछ मामलों में, इंटरमीडिएट (10+2) पास और बायोलॉजी या एग्रीकल्चर एक विषय के रूप में।
    भर्ती:
    उत्तराखंड में, पशुधन प्रसार अधिकारी के पद पर भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा की जाती है।
    वेतन:
    पशुधन प्रसार अधिकारी का वेतनमान 35400-112400 रुपये (स्तर-06) है।
    अतिरिक्त जानकारी:
    पशुधन प्रसार अधिकारी, पशुपालन विभाग में पशुचिकित्साधिकारी संवर्ग के बाद दूसरा सबसे बड़ा तकनीकी संवर्ग है।
    यह पद, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    यह पद, ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन विकास और प्रबंधन में योगदान देता है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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