• Sun. Mar 15th, 2026

    2018 से पहले नियमित हो चुके कर्मचारियों को नियमित माना जाए- नैनीताल हाईकोर्ट

    उत्तराखंड: नैनीताल हाईकोर्ट ने कहा है कि जो कर्मचारी 4 दिसंबर 2018 से पहले नियमित हो चुके हैं, उन्हें नियमित माना जाए। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि 2013 के नियमों के अनुसार, दस साल तक दैनिक वेतन और अनुबंध पर सेवा करने की बाध्यता के आधार पर अन्य को नियमित किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए सरकार की 2013 की नियमावली को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। मामले की सुनवाई कल मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई. हाईकोर्ट के इस फैसले से 4000 से ज्यादा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को फायदा होगा।

    गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2018 को सरकारी विभागों, निगमों और अन्य सरकारी निकायों में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर रोक लगाने का आदेश देते हुए 2013 नियमावली के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तभी से रुकी हुई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकारी विभागों और अन्य सरकारी निकायों में बिना किसी चयन प्रक्रिया के कर्मचारियों को नियमित किए जाने से उनके हित प्रभावित हो रहे हैं। उमा देवी बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप, राज्य सरकार ने 2011 में कर्मचारियों के नियमितीकरण नियमावली बनाई जिसके तहत यह निर्णय लिया गया कि जिन कर्मचारियों ने दैनिक वेतन, तदर्थ या अनुबंध के आधार पर 10 या अधिक वर्षों तक काम किया है। नियमित किया गया। हालांकि, उत्तराखंड बनने के बाद बने नए विभागों में ऐसे कर्मचारियों को इस नियमावली के दायरे में नहीं लाया जा सका। सरकार ने दिसंबर 2013 में एक नई नियमावली जारी की, जिसके तहत ऐसे कर्मचारी जिन्होंने दिसंबर 2008 में पांच या अधिक साल की सेवा पूरी कर ली थी, वे नियमितीकरण के पात्र थे। विभिन्न याचिकाकर्ताओं की मांग पर सरकार ने इस अवधि में संशोधन कर 10 साल कर दिया।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *