शुभांशु शुक्ला की एक्सियम-4 उड़ान फिर टली
एक्सियम-4 मिशन, जिसमें भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सवार हैं, को एक बार फिर टाल दिया गया है। बीते एक महीने में यह छठी बार है जब इस मिशन को स्थगित किया गया है। नासा ने हाल ही में अंतरिक्ष स्टेशन में हुए मरम्मत कार्य के बाद उसकी वर्तमान स्थिति की जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इस निर्णय से अंतरिक्ष यात्री, नासा, एक्सियम स्पेस और स्पेसएक्स के संयुक्त मिशन की योजना प्रभावित हुई है।
ज्वेज्दा मॉड्यूल की मरम्मत के बाद आईएसएस की स्थिति पर नजर
नासा के बयान के अनुसार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल के पिछले हिस्से में हुए मरम्मत कार्य के बाद उसके प्रदर्शन की जांच की जा रही है। यह मॉड्यूल जीवन रक्षक प्रणाली और स्टेशन की प्रपल्शन से जुड़ा एक अहम हिस्सा है। चूंकि आईएसएस की सभी प्रणालियां एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इसलिए नासा किसी भी नए दल को भेजने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्टेशन पूरी तरह तैयार हो।
नासा ने स्पष्ट किया है कि इसी कारण 22 जून को प्रस्तावित लॉन्च को टालने का निर्णय लिया गया है। एक्सियम स्पेस और स्पेसएक्स जैसे सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर अब एक नई लॉन्च तारीख पर विचार किया जा रहा है, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी।
क्रू टीम फ्लोरिडा में क्वारंटीन में, स्टेशन से अनुमति का इंतजार
भले ही मिशन की यह देरी निराशाजनक हो, नासा ने भरोसा दिलाया है कि सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हैं और स्टेशन से अनुमति मिलते ही उड़ान के लिए तैयार हैं। शुभांशु शुक्ला समेत पूरी टीम फिलहाल फ्लोरिडा में क्वारंटीन में है ताकि वे पूरी तरह से फिट और संक्रमण मुक्त रह सकें।
यह मिशन का छठा स्थगन है, जो यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न एजेंसियों और निजी भागीदारों के साथ मिलकर किसी मिशन को अंजाम देना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। भारत के लिए यह मिशन खास है क्योंकि शुभांशु शुक्ला हालिया वर्षों में अंतरिक्ष जाने वाले चुनिंदा भारतीय रक्षा कर्मियों में से एक हैं।
नासा और उसके सभी साझेदारों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक अंतरिक्ष स्टेशन की सभी प्रणालियों को पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता, तब तक कोई नई लॉन्च तारीख तय नहीं की जाएगी। इंजीनियर और मिशन नियोजक ज्वेज्दा मॉड्यूल और पूरे स्टेशन की स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए हैं।
एक बार जब यह मिशन उड़ान भरेगा, तो यह मानव अंतरिक्ष यात्रा में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण कदम होगा। एक अनुभवी भारतीय वायुसेना अधिकारी की इसमें भागीदारी इसे वैश्विक दृष्टि से और भी खास बनाती है। फिलहाल, अंतरिक्ष जगत की निगाहें नासा और उसके भागीदारों के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो इस मिशन को हरी झंडी देने की दिशा में निर्णायक होगा।
