• Sat. Mar 21st, 2026

    Navratri 2025 मां ब्रह्मचारिणी का दिन, जानिए मंत्र, पूजा विधि

    नवरात्रि, यानी देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का महापर्व। इन नौ दिनों में हर दिन देवी के एक अलग रूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि का दूसरा दिन, यानी मां ब्रह्मचारिणी का दिन। क्या आप जानते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी कौन हैं और इनकी पूजा का क्या महत्व है?

     

    कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?

    मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं देवी ब्रह्मचारिणी। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार, मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी। यह देवी माता पार्वती का अविवाहित रूप हैं। जब उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, तब वे ब्रह्मचारिणी कहलाईं।

     

    कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा?

    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। पूजा के लिए कुछ आवश्यक नियम हैं, जिन्हें जानकर आप अपनी पूजा को और भी फलदायी बना सकते हैं:

     

    सुबह जल्दी उठें: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:36 से 5:24 बजे) या अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:48 से 12:36 बजे) में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

     

    फूल और प्रसाद: मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत प्रिय है। इसलिए उन्हें चमेली के फूल, चावल और चंदन चढ़ाएं।

     

    भोग: मां को दूध, दही, शहद और विशेष प्रकार की मिठाई का भोग लगाएं।

     

    मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

     

    पूजा विधि: कलश की पूजा करें और फिर मां ब्रह्मचारिणी और भगवान शिव की मूर्ति को स्थापित करें।

     

    अंतिम चरण: पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद को जरूरतमंद लोगों में बांटें।

     

    मां ब्रह्मचारिणी से जुड़े विशेष मंत्र

    प्रार्थना:

     

    दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।

    देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

     

    स्तुति:

     

    या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

     

    नवरात्रि का दूसरा दिन आत्म-अनुशासन और तपस्या का प्रतीक है। तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सफल बनाएं।

     

    क्या आप जानते हैं?

     

    माता ब्रह्मचारिणी के तप का एक और रोचक किस्सा है। जब वे भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं, तब उन्होंने कई हजार वर्षों तक बिना कुछ खाए-पिए तपस्या की। उनकी इस तपस्या से देव, ऋषि-मुनि और सभी देवी-देवता आश्चर्यचकित रह गए थे। इसके बाद माता ब्रह्मचारिणी ने सूखे बिल्व पत्र खाकर भी तपस्या जारी रखी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर क्षीण हो गया और उनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। देवताओं और ऋषियों ने उनकी तपस्या की सराहना की और कहा कि आप से ही यह तप संभव था और अब आपकी मनोकामना जरूर पूर्ण होगी।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *