• Sun. Mar 29th, 2026

    अब और प्रतीक्षा नहीं — जनसुरक्षा सर्वोपरि, वन्यजीव समस्या पर संजय पाण्डे की पहल

    वन्यजीव समस्या पर संजय पाण्डे की पहल, प्रभागीय वनाधिकारी के साथ निर्णायक बैठक, तेंदुओं और बंदरों से जुड़ी चुनौती पर बनी बहुस्तरीय कार्ययोजना

    अल्मोड़ा, नगर क्षेत्र और आस-पास के गांवों में तेंदुओं व बंदरों की लगातार बढ़ती सक्रियता और मानव जीवन पर बढ़ते खतरे को लेकर आज सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने प्रभागीय वनाधिकारी श्री दीपक सिंह से उनके कार्यालय में एक महत्वपूर्ण और सार्थक बैठक की। बैठक में जनसुरक्षा, वन्यजीव प्रबंधन और प्रशासनिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और समस्याओं की जड़ तक जाकर समाधान की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।

    तेंदुए के पिंजरे में फंसने की प्रक्रिया में बाधा डालने वालों की जवाबदेही तय हो
    संजय पाण्डे ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने हेतु लगाए गए पिंजरों में कई बार जानवरों को चारे के रूप में रखने पर कुछ लोग “पशु प्रेम” के नाम पर हस्तक्षेप करते हैं, जिससे तेंदुआ पिंजरे तक आकर भी फंस नहीं पाता। इससे नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा खतरा बना रहता है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में जो लोग आपत्ति करें, उनसे मौके पर एक लिखित शपथ-पत्र लिया जाए, जिसमें यह उल्लेख हो कि यदि तेंदुए द्वारा जनहानि होती है तो उसका पूर्ण उत्तरदायित्व वे स्वयं वहन करेंगे। इस पर प्रभागीय वनाधिकारी ने सहमति जताई।

    बंदर समस्या: वाहनों द्वारा जंगलों में छोड़े जाने की पुष्टि, सघन निगरानी शुरू
    प्रभागीय वनाधिकारी श्री दीपक सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि बंदरों को अन्य जिलों से ट्रकों में भरकर अल्मोड़ा के वन क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। इसे रोकने हेतु वन विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

    सभी चेकपोस्टों पर भारी वाहनों की गहन जांच के आदेश।

    सीसीटीवी कैमरों की 24 घंटे सक्रिय निगरानी।
    पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सभी चौकियों को सतर्क रहने का आग्रह।
    नगर निगम की निष्क्रियता पर नाराज़गी, शिकायत लंबित
    संजय पाण्डे ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर विषय को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (शिकायत संख्या CMHL-062025-8-767870) के माध्यम से उठाया था, लेकिन यह नगर निगम स्तर पर अभी तक लंबित है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने अपने चुनावी वादों में बंदर समस्या के समाधान का वादा किया था, परन्तु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
    उन्होंने जिलाधिकारी पर भी नाराज़गी जताई कि वे आम जनता की अपेक्षाओं को नजरअंदाज़ कर रहे हैं और केवल राजनीतिक प्रतिनिधियों की सुनवाई कर रहे हैं।

    वनों में फलदार वृक्ष लगाने का सुझाव – दीर्घकालिक समाधान की दिशा में पहल
    पाण्डे ने सुझाव दिया कि जंगलों में फलदार वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाना चाहिए, ताकि बंदर, भालू, तेंदुए जैसे वन्य जीवों को भोजन के लिए मानव बस्तियों में न आना पड़े। इस कार्य में उद्यान विभाग का तकनीकी सहयोग आवश्यक होगा।

    प्रभागीय वनाधिकारी ने इस सुझाव की सराहना करते हुए इसे दीर्घकालिक समाधान की दिशा में उपयोगी पहल बताया और आश्वासन दिया कि वन विभाग इस दिशा में कार्रवाई करेगा।
    सख्त संदेश: अब चुप नहीं बैठूंगा
    पाण्डे ने स्पष्ट कहा,

    “यह केवल वन विभाग या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है, यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। मैं केवल बोलने नहीं, समाधान के लिए संकल्प के साथ खड़ा हूं। यदि लापरवाही जारी रही तो मैं यह विषय शासन, न्यायालय और जनता के बीच लेकर जाऊंगा।”
    उत्तराखंड शासन की ओर से बंदर समस्या समाधान हेतु ठोस पहल
    उत्तराखंड सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान और मनुष्यों पर हो रहे हमलों की रोकथाम के लिए एक अहम प्रशासनिक पहल शुरू की है।

    प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग की अध्यक्षता में दिनांक 30 अप्रैल 2025 को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें वन विभाग, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, शहरी विकास और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

    इस बैठक के निर्णय के आधार पर शहरी विकास विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे शासनादेश संख्या 3666/X-2-13-19(06)2013, दिनांक 02.09.2013 से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
    SOP का उद्देश्य

    शहरी क्षेत्रों में मानव-बंदर संघर्ष को रोकना
    बंदर समस्या का प्रभावी और व्यवस्थित समाधान
    नगर निकायों के कार्यों में समन्वय और जवाबदेही लाना
    संबंधित अधिकारियों को SOP की प्रति भेजी गई है और अपेक्षा की गई है कि वे वैज्ञानिक, मानवीय और प्रशासनिक रूप से संतुलित उपायों को अमल में लाएं।
    निष्कर्ष
    सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे की पहल ने न केवल स्थानीय प्रशासन को जगाया है, बल्कि वन विभाग से ठोस आश्वासन भी प्राप्त किए हैं। साथ ही, राज्य सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता भी इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
    अब वक्त है कि समाज, प्रशासन और शासन – सभी मिलकर इस संकट का समाधान करें, ताकि इंसान और वन्यजीव – दोनों सुरक्षित रह सकें।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *