लोक कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देने के लिए तैयार
उत्तराखंड में मां नंदा देवी महोत्सव की तैयारियां अलग अलग जिलों जोर शोर से प्रारंभ हो रही है।मां नंदा सुनंदा का ये महोत्सव तीन से चार दिन तक बडी धूमधाम व हर्षोल्लास पूर्वक उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर मनाया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां नंदा भादों के महीने अपने मायके आती है। मां नंदा के मायके आने पर कुमाऊं, गढ़वाल में पंचमी तिथि को मां नंदा की प्रतिमा हस्थ निर्मित करके अष्टमी के दिन ये मूर्तीयाँ प्राण प्रतिष्ठित की जाती है।उस दिन समझा जाता है मां नंदा, सुनंदा अपने ससुराल चले गई। मां नंदा देवी को कुमाऊं की कुल देवी की तौर माना जाता है।
अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल में नंदा देवी व सुनंदा की प्रतिमा पंचमी तिथि को बनाकर अष्टमी तक नंदा देवी महोत्सव को बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है। अलग-अलग जिलों में अगल अलग तरीके से कुमाऊं के लोककलाकारों के द्बारा नंदा देवी जागर व अन्य लोकगीतों के द्वारा अष्टमी तक मनाते हैं अष्टमी के दिन मां नंदा, सुनंदा की हाथों से निर्मित मुर्तियां प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है।
बताया जाता उस दिन समझा जाता मां नंदा सुनंदा अपने मायके चले गए।मां नंदा व सुनंदा की प्रतिमा एक साथ बनाने की कहावत है। जब मां नंदा व उनकी बहन सुनंदा अपने मायके जा रही थी। रास्ते में उनको भैंसा मिला भैंसा उनको मारने दौड़ा उन दोनों ने अपनी जान बचाने के लिए केले के पेड़ छिप गई तो बकरे ने केले के पत्ते खा दिये भैंसा ने उनकी हत्या कर दी तब से मां नंदा सुनंदा की प्रतिमा केले के पेड से ही अधिकतर बनाई जाती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां नंदा का मायका गढ़वाल के चमोली जिले के नौटी गांव में बताया जाता है।आज श्री सिद्ध पीठ नंदा देवी नंदा धाम नौटी में है।समुचे गढ़वाल व कुमाऊं के लोगों के द्वारा प्राचीन काल से ही ये कहावत मां नंदा देवी अपने ससुराल चमोली के चांदपुर क्षेत्र नंदाक बांधाण से नौटी गांव आई। 12साल तक नौटी गांव से चांदपुर नंदाक बांधाण अपने ससुराल नहीं गई।मां नंदा देवी पार्वती का का रुप माना जाता है।तब उस समय चमोली व अन्य गढ़वाल क्षेत्र के लोगों ने नौटी गांव से मां नंदा देवी के ससुराल तक के लिए नंदा देवी राजजात यात्रा की गई। आज भी नौटी गांव से चांदपुर नंदाक बांधाण तक हर 12साल में नंदा देवी राजजात यात्रा की जाती फिर व नंदा देवी राजजात यात्रा नौटी गांव वापस आती है।
नौटी गांव श्री सिद्ध पीठ नंदा देवी नंदा धाम में आज भी नंदा देवी की पूजा अर्चना बारोमास होती है। कुमाऊं में इस मां नंदा व सुनंदा पर एक लोकगीत भी गाया जाता है। मां नंदा सुनंदा तू दैण है जाये भगवती मया तू सबनौहौं सफलै है जाये।
इधर स्वगीर्य पप्पू कार्की जी ने भी मां नंदा व सुनंदा पर जागर गाया है। गढ़वाल में नरेंद्र सिंह नेगी व अन्य लोकलाकारों के द्वारा नंदा मां व सुनंदा के बारे में बिधि बिधान से अपने तरीके इस गाथा को गाया है। अभी वर्तमान में सीमा गुसाई लोकगायिका मां नंदा देवी के जागर को गाती रहती है। पिछले साल अल्मोड़ा में तीन दिवसीय नंदा देवी महोत्सव में सीमा गुसाई लोकगायिका ने अपने स्तर से प्रतिभाग किया। नंदा देवी का मेला लोक गायको व कलाकारों को अपनी प्रतिभा लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने व जनता को अपनी संस्कृति को देखने व पहचानने का सुनहरा अवसर देती है।

लोकगायिका सीमा गुसाईं
