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    उत्तराखण्ड: आशा हेल्थ वर्कर्स मांगो को लेकर 26 फरवरी को देंगी धरना

    उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन अपनी मांगो को लेकर कल 26 फरवरी को समस्त आशा कार्यकर्ताओं के साथ देहरादून विधानसभा के पास धरना प्रदर्शन करेंगी।

    कल 26 फरवरी 2024 को विधानसभा सत्र 1 दिन का है जिसमें सभी जिलों की सीटू और एक्टू की आशा वर्कर ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में सम्मिलित होकर अपने-अपने हक के लिए आवाज उठाने वाली है

    कमला कुंजवाल आशा हेल्थ वर्कश युनियन प्रदेश अध्यक्ष ने बताया 26 तारीख को विधानसभा सत्र है जिसमें एल आई सी बिल्डिंग धरमपुर देहरादून में सभी को 11:00 से 12:00 बजे के बीच में एकत्रित होना है। इन सभी कार्यक्रमों की सूचना सभी जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों को दे दी गई है एक बार पूरे यूनियन के सभी पदाधिकारी की तरफ से अपनी आशा बहनों से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन करती हूं कि बहनों मात्र एक दिन का सत्र है और आप सभी लोगों को सभी लोगों को अपने आसपास की सभी आशा बहनों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में लेकर के आना है जिससे सरकार पर अच्छा दबाव पड़े और हमारी मांगों पर कार्रवाई हो सके इसलिए सभी आशा बहाने अपने साथ वालों को बताएं और कल 26 फरवरी 2024 को सभी लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में एल आई सी बिल्डिंग धर्मपुर में पहुंचने का कष्ट करें समय का विशेष ध्यान रखें।

    साथ ही उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर समस्याओं का तत्काल समुचित समाधान करने की मांग करेंगी ।


    उनकी मांग है कि उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाएं विभाग के सभी अभियानों और सर्वे में लगा दी गई हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशु की सेवा से शुरू करते हुए आज आशा वर्कर्स को सारे काम करने पड़ रहे हैं लेकिन आपकी सरकार आशाओं को न्यूनतम वेतन तक देने को तैयार नहीं है। आशाओं को उनके काम के अनुरूप पैसा मिलना तो दूर वादा किया गया पैसा भी नहीं मिल रहा है। आशाओं की लगातार ट्रेनिंग चलती रहती हैं लेकिन ट्रेनिंग में दिया जाने वाला पैसा इतना भी नहीं होता कि दूर दराज से आने वाली आशाएं अपना किराया भाड़ा भी दे सकें। आशाओं को मिलने वाला विभिन्न मदों का प्रति माह मिलने वाला पैसा छह छह माह तक नहीं मिल रहा है जिसके कारण आशाएं बहुत दिक्कतों का सामना कर रही हैं।

    आशाओं को नियमित वेतन तो आपकी सरकार दे नहीं रही है और ट्रेनिंग का पैसा भी घटता जा रहा है। पल्स पोलियो अभियान में भी प्रतिदिन सौ रुपए मात्र पर पूरा हफ्ता आशाओं को अभियान चलाना होता है।

    एक तो आशाओं न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा कुछ भी नहीं मिलता दूसरी ओर काम के बोझ को लागातार बढ़ाया जाना कहां तक न्यायोचित है?

    साथ ही हम याद दिलाना चाहते हैं कि, 31 अगस्त 2021 को उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) के आंदोलन के बाद आपके खटीमा स्थित कैम्प कार्यालय में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद आपने आशाओं को मासिक मानदेय नियत करने व डी.जी. हेल्थ उत्तराखंड के आशाओं को लेकर बनाये गये प्रस्ताव को लागू करने का वादा किया था। लेकिन आपके वादे को तीन साल पूरा होने को है लेकिन आपकी सरकार द्वारा यह वादा पूरा नहीं किया गया है। इस वायदे को आशाओं के हित में आपको अवश्य ही पूरा करना चाहिए।

    स्वास्थ्य विभाग की नियमित कर्मचारी न होते हुए भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी लगन और मेहनत के साथ बेहतर काम के बल पर आशायें स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बन चुकी हैं इसलिए आज समय आ गया है कि आशाओं के शानदार योगदान के महत्व को समझते हुए उनको न्यूनतम वेतन देते हुए स्वास्थ्य विभाग का स्थायी कर्मचारी घोषित किया जाय और सेवानिवृत्त होने पर सभी आशाओं के लिए एकमुश्त धनराशि व आजीवन अनिवार्य पेंशन का प्रावधान किया जाय।

    हम उक्त परिस्थिति के आलोक में आशाओं की समस्याओं के समाधान हेतु आपसे उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) की ओर से मांग करते हैं कि:

    1. आशाओं को मासिक मानदेय नियत करने व डी.जी. हेल्थ उत्तराखंड द्वारा आशाओं के मानदेय को लेकर बनाए गए 2021 के प्रस्ताव को लागू करने का आपके द्वारा खटीमा में किया गया वादा तत्काल पूरा किया जाय।
    2. आशाओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा व सेवानिवृत्त होने पर सभी आशाओं को अनिवार्य पेंशन का प्रस्ताव विधानसभा के इसी सत्र में पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाय।
    3. जब तक सेवानिवृत्त होने वाली आशाओं को मासिक पेंशन का प्रावधान नहीं किया जाता तब तक रिटायरमेंट के समय दस लाख की एकमुश्त धनराशि दी जाय।
    4. आशाओं को विभिन्न मदों के लिए दिए जाने वाले पैसे कई कई महीनों तक लटकाने के स्थान पर अनिवार्य रूप से हर महीने दिया जाय।
    5. आशाओं को ट्रेनिंग व पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रति दिन पांच सौ रुपए का भुगतान किया जाय।
    6. सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को तत्काल भरा जाय।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि आशाओं की उक्त मांगों पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री मंत्री तत्काल समाधान करेंगे। अन्यथा आशाओं को एक बार फिर से राज्यव्यापी आन्दोलन को बाध्य होना पड़ेगा।

    ईमेल- aicctu.uk@gmail.com

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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